देहरादून। उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग में प्रभारी अधिशासी अधिकारी (Executive Officer-EO) की नियुक्तियों को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थमता नजर आ रहा है। राज्य सरकार ने 17 जुलाई 2026 को जारी 34 प्रभारी अधिशासी अधिकारियों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण संबंधी सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं।
शनिवार को जारी आदेश के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वहीं, उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने इसे अपने आंदोलन और सरकार पर बनाए गए दबाव की बड़ी सफलता करार दिया है।
शहरी विकास मंत्री के निर्देश पर जारी हुआ आदेश
शनिवार को जारी आदेश के अनुसार, शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने सचिव, शहरी विकास विभाग को निर्देश दिए कि 17 जुलाई 2026 को जारी 34 अधिशासी अधिकारियों एवं प्रभारी अधिशासी अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती संबंधी आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
विभाग को निर्देशित किया गया कि निरस्तीकरण आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

क्या था पूरा मामला?
कुछ दिन पहले शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों में कार्यरत क्लर्क, कर निरीक्षक, कर संग्रहकर्ता, सफाई निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों को विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में प्रभारी अधिशासी अधिकारी (EO) की जिम्मेदारी सौंपी थी।
विभाग का तर्क था कि प्रदेश में नियमित अधिशासी अधिकारियों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। ऐसे में नगर निकायों का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसलिए अस्थायी व्यवस्था के तहत प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।
हालांकि आदेश जारी होने के बाद इस फैसले को लेकर व्यापक विवाद शुरू हो गया।
नियमों के उल्लंघन के लगे आरोप
कर्मचारी संगठनों, विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इन नियुक्तियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जिन कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाया गया, वे सेवा नियमों के अनुसार इस पद के लिए पात्र नहीं हैं।
संगठनों का यह भी कहना था कि रिक्त पदों को अस्थायी व्यवस्थाओं से भरने के बजाय सरकार को नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।
बेरोज़गार संघ के आंदोलन के बाद बढ़ा दबाव
इसी मुद्दे को लेकर उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने आंदोलन शुरू किया था। शनिवार को संगठन के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में युवाओं ने शहरी विकास निदेशालय के बाहर प्रदर्शन किया और नियुक्तियों को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रभारी ईओ की नियुक्तियां नियमों के विपरीत की गई हैं।
राम कंडवाल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रत्येक नियुक्ति के लिए ₹15 लाख तक की लेन-देन हुई है। हालांकि संगठन की ओर से इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी या आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है।
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने सरकार से मांग की है कि केवल नियुक्तियां रद्द करना पर्याप्त नहीं होगा। संगठन का कहना है कि नगर निकायों में अधिशासी अधिकारियों के रिक्त पदों पर पारदर्शी और नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए, ताकि लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में फिर से नियमों के विपरीत नियुक्तियां की गईं तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सरकार ने कारण नहीं किया स्पष्ट
हालांकि सरकार ने नियुक्तियां रद्द करने का आदेश तो जारी कर दिया है, लेकिन इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि अब नगर निकायों में अधिशासी अधिकारियों के रिक्त पदों पर प्रशासनिक कार्य किस व्यवस्था के तहत संचालित होंगे। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी या फिर प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई नया विकल्प अपनाया जाएगा।






