विधायक कैड़ा हुआ तो क्या?

उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार निर्दलियों की पूछ ही नहीं हो रही है। वरना पिछली तीन सरकारों में निर्दलीय लालबत्ती धारक से लेकर दायित्वधारी और राज्य मंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री तक पहुंचने में सफल रहे। निर्दलियों द्वारा इसी तरह मलाई काटने के शानदार अनुभव को देखते हुए कांग्रेस के ऑफर के बावजूद दिनेश […]

उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार निर्दलियों की पूछ ही नहीं हो रही है। वरना पिछली तीन सरकारों में निर्दलीय लालबत्ती धारक से लेकर दायित्वधारी और राज्य मंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री तक पहुंचने में सफल रहे। निर्दलियों द्वारा इसी तरह मलाई काटने के शानदार अनुभव को देखते हुए कांग्रेस के ऑफर के बावजूद दिनेश धनै ने उनका सिंबल ठुकरा दिया था। कांग्रेस द्वारा भीमताल विधानसभा सीट से भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए दान सिंह भंडारी को टिकट दिए जाने के बाद पिछले चुनाव में कांग्रेस के सिंबल पर लड़े राम सिंह कैड़ा निर्दलीय मैदान में कूदकर जीत गए। जीतने के बाद निर्दलियों की क्या हालत हो सकती है, यह कोई रामसिंह कैड़ा से पूछे। उन्हें कभी भाजपा एसोसिएट सदस्य बनाने की बात कर रही है, कभी सदस्यता दिलाने की। कैड़ा हैं कि चाहकर भी कुछ नहीं बोल पा रहे। सदन में भाजपाइयों के साथ खड़े कैड़ा फिलहाल खुद पर ही ‘कैड़ा’ साबित हो रहे हैं।

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