सुपरटेक को डंडा!

सिडकुल से जमीन लेने के बाद भुगतान की किस्तों में आनाकानी करने पर सिडकुल प्रशासन ने कंपनी को तत्काल बकाया भुगतान न करने पर आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी है। पर्वतजन ब्यूरो सरकार से औने-पौने दाम पर जमीन लेने के बाद सुपरटेक भुगतान करने में आनाकानी करने लगी है। सुपरटेक को पूर्व मुख्यमंत्री विजय […]

सिडकुल से जमीन लेने के बाद भुगतान की किस्तों में आनाकानी करने पर सिडकुल प्रशासन ने कंपनी को तत्काल बकाया भुगतान न करने पर आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी है।

पर्वतजन ब्यूरो

सरकार से औने-पौने दाम पर जमीन लेने के बाद सुपरटेक भुगतान करने में आनाकानी करने लगी है।
सुपरटेक को पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपने पुत्र साकेत के कहने पर १६ नवंबर २०१२ को देहरादून मुख्यालय में आयोजित नीलामी में सुपरटेक कंपनी को २७.७७ एकड़ भूमि आवंटित की थी। सुपरटेक ने बीते दो वर्ष से ४ किस्तें जमा नहीं की है। सिडकुल मुख्यालय के कहने पर क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव चटवाल ने सुपरटेक से २७.२९ करोड़ रुपए वसूलने के लिए आरसी काट दी है।
बहानेबाजी कर रहा सुपरटेक
सुपरटेक ने भारी बरसात होने का बहाना बनाते हुए सिडकुल को जमीन के भुगतान के लिए किस्त चुकाने से असमर्थता दिखाई है। सुपरटेक ने कहा कि भारी बरसात के कारण उनकी बुकिंग और आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। साथ ही उसने प्रोजेक्ट के निर्माण की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। और तो और सुपरटेक ने सिडकुल से ब्याजमाफी का भी अनुरोध किया है। दो कदम आगे बढ़कर सुपरटेक ने पास में बहने वाली कल्याणी नदी को चैनलाइज करने की भी मांग की है।
१५ जनवरी २०१३ को सुपरटेक को उक्त भूमि आवंटित की गई थी और भूमि की लीज डीड में तय शर्तों के अनुसार भूमि आवंटन के ३६ माह के अंतर्गत कंपनी को निर्माण कार्य पूरा कर देना जरूरी था, किंतु साढ़े तीन साल गुजर जाने के बाद भी कंपनी निर्माण कार्य पूरा नहीं कर पाई है। सुपरटेक कंपनी सिडकुल को कल्याणी नदी की धार मोडऩे के लिए कह रही है। इसके पीछे कंपनी का उद्देश्य है कि इस बहाने उसे भुगतान करने के लिए समय की कुछ मोहलत मिल जाए।
शर्तों का उल्लंघन
लीज डीड के अनुसार सिडकुल ने आवंटित भूभाग के अंदर कोई निर्माण कार्य नहीं करना है। सिडकुल को आवंटित प्लाट के बाहर से संपर्क रोड आदि निर्मित करनी थी, जो वह कर चुका है। इसके अलावा सिडकुल के अधिकांश अवस्थापना निर्माण के कार्य पूरे हो चुके हैं। जिस समय सुपरटेक को भूमि आवंटित हुई थी, उस समय भी कल्याणी नदी पास से ही बहती थी। भूमि पर कब्जा लेते समय और तमाम लिखापढ़ी के समय कंपनी ने ये सवाल नहीं उठाया। सिडकुल के प्रबंध निदेशक आर. राजेश कुमार कहते हैं कि सुपरटेक अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए और भुगतान लंबित रखने के लिए एक के बाद एक बहानेबाजी कर रही है। एमडी आर. राजेश कुमार कहते हैं कि यदि कंपनी ने जल्दी ही भुगतान नहीं किया तो सुपरटेक को आवंटित भूमि का पट्टा निरस्त कर दिया जाएगा।
धोखाधड़ी के चर्चित
इधर सुपरटेक को एक और झटका लगा है। सुप्रीमकोर्ट ने ७ सितंबर को सुपरटेक के खिलाफ कड़ी फटकार लगाते हुए नोयडा में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में निवेशकों का पैसा लौटाने का कड़ा आदेश दिया है। सुपरटेक ने नोयडा में एक टावर के निर्माण में निवेशकों के साथ धोखा किया था। सुप्रीमकोर्ट ने सुपरटेक को साफतौर पर फटकार लगाते हुए कहा कि कंपनी डूबी या मरे, किसी भी हालत में कंपनी को निवेशकों के पैसे चार सप्ताह में लौटाने होंगे।
सुपरटेक को सहस्त्रधारा रोड स्थित भूमि भी पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में दी गई थी। कमर्शियल हब बनाने के लिए जब टेंडर आमंत्रित किए गए तो सुपरटेेक ने अपने ही पारिवारिक कंपनियों के साथ मिलकर टेंडर डाला था, लेकिन सब जानते बूझते भी तत्कालीन जिम्मेदार अफसरों ने सुपरटेक को भूमि आवंटित कर दी थी।
१४ मार्च २०१४ को आयोजित विधानसभा सत्र में भाजपा ने हरिद्वार में सुपरटेक को भूमि आवंटित करने पर जमकर हंगामा किया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। यहां तक कि उन्होंने तत्कालीन राज्यपाल अजीज कुरैशी को भी भाषण नहीं देने दिया था। आज विजय बहुगुणा भाजपा में हैं और भाजपा इस मुद्दे पर खामोश है।

”सुपरटेक को लीज डीड की शर्तां का उल्लंघन करने पर चेतावनी दी गई है। यदि जल्दी कंपनी बकाया किश्त का भुगतान नहीं करेगी, आवंटित पट्टा निरस्त कर दिया जाएगा।ÓÓ – आर. राजेश कुमार
मैनेजिंग डायरेक्टर

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