बड़ी खबर: देवराणा घाटी की प्यास नहीं बुझा सकी 16 करोड़ की पेयजल योजना। एक हजार परिवारों को फिर झेलनी पड़ेगी जल संकट

नौगांव (उत्तरकाशी), 2 मई 2026। नीरज उत्तराखंडी  देवराणा घाटी के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को इस वर्ष की गर्मियों में भी बहुप्रतीक्षित देवराणा पेयजल पंपिंग योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही योजना पिछले दो वर्षों से अधूरी पड़ी है, जिसके चलते […]

नौगांव (उत्तरकाशी), 2 मई 2026। नीरज उत्तराखंडी 
देवराणा घाटी के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को इस वर्ष की गर्मियों में भी बहुप्रतीक्षित देवराणा पेयजल पंपिंग योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।

करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही योजना पिछले दो वर्षों से अधूरी पड़ी है, जिसके चलते घाटी के लगभग एक हजार परिवारों को इस बार भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा।

गर्मी बढ़ते ही क्षेत्र के गांवों में जल संकट गहराने लगा है। बजलाड़ी, पमाड़ी, धारी, तियां, छुड़ी और टेड़ा गांव में पेयजल स्रोत सूखने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अभी मई की शुरुआत में ही हालात खराब हो चुके हैं और आने वाले महीनों में समस्या और गंभीर हो सकती है। कई गांवों में लोगों को दूरस्थ स्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण प्रशासन से टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

दो साल से अधूरी पड़ी योजना

जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही 14 किलोमीटर लंबी देवराणा पंपिंग पेयजल योजना का उद्देश्य देवराणा घाटी के अनेक गांवों तक नियमित पेयजल पहुंचाना था।

योजना से बजलाड़ी, तियां, धारी, जरड़ा, छुड़ी, टेड़ा, खाबला, नरयुंका, पमाड़ी, मानद गांव और स्योरी फल पट्टी सहित आसपास के क्षेत्रों को लाभ मिलना प्रस्तावित था।

योजना पूरी होने पर लगभग एक हजार परिवारों को स्थायी पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मुख्य पंप हाउस के लिए चयनित भूमि विवादित होने के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया। भूमि विवाद न्यायालय में विचाराधीन रहने से परियोजना का कार्य लंबे समय तक ठप पड़ा रहा।

बिना उपयोग के खड़ा सप्लाई टैंक

देवराणा घाटी में योजना के तहत बनाए गए कुछ ढांचागत निर्माण अब भी बिना उपयोग के पड़े हैं। सप्लाई टैंक और पाइपलाइन का एक हिस्सा तैयार होने के बावजूद पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी योजना धरातल पर लाभ नहीं दे पा रही है।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य रमेश इंदवाण ने कहा कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि समय पर योजना पूरी नहीं होने से लोग हर वर्ष गर्मियों में पानी के लिए परेशान होते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का कार्य लंबे समय तक अधर में लटका रहने से न केवल सरकारी धन प्रभावित हुआ, बल्कि लोगों की उम्मीदें भी टूट रही हैं।

विभाग का दावा – दिसंबर तक शुरू होगी आपूर्ति

पेयजल निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता मधुकांत कोटियाल का कहना है कि योजना में आ रही अधिकांश बाधाओं का समाधान कर लिया गया है। विभाग का दावा है कि दिसंबर 2026 तक योजना से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

हालांकि, स्थानीय लोग विभाग के आश्वासनों पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि पिछले दो वर्षों से योजना पूरी होने की समयसीमा लगातार आगे बढ़ती रही है।

हर गर्मी में लौट आता है संकट

देवराणा घाटी के ग्रामीणों के लिए पेयजल संकट कोई नई समस्या नहीं है। हर साल गर्मी के मौसम में प्राकृतिक स्रोतों में पानी कम होने से गांवों में किल्लत बढ़ जाती है। ऐसे में अधूरी पड़ी पेयजल योजना लोगों के लिए राहत बनने के बजाय इंतजार का कारण बन गई है।

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