देहरादून:
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड के कोटद्वार में ‘बाबा’ नामक दुकान को लेकर हुए विवाद से चर्चा में आए दीपक कुमार कश्यप उर्फ मोहम्मद दीपक से दिल्ली स्थित अपने आवास पर मुलाकात की. इस मुलाकात की तस्वीरें राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कीं और दीपक की सराहना करते हुए संदेश भी लिखा.
राहुल गांधी ने पोस्ट में लिखा, “हर इंसान, एक समान — यही भारतीयता है, यही मोहब्बत की दुकान है. उत्तराखंड के भाई मोहम्मद दीपक से मुलाकात. एकता और साहस की ऐसी ही लौ हर भारतीय युवा में जलनी चाहिए.”
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने दीपक का उल्लेख किया हो. इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दीपक को “भारत का हीरो” बताया था.
पहले भी कर चुके हैं समर्थन
पूर्व में साझा किए गए संदेश में राहुल गांधी ने लिखा था कि उत्तराखंड का दीपक संविधान और इंसानियत के पक्ष में खड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा और संघ परिवार संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि नफरत और डर का माहौल देश की प्रगति में बाधा बनता है और ऐसे समय में साहस के साथ खड़े होने वालों की जरूरत है.
उन्होंने अपने संदेश में लिखा था कि उत्तराखंड में भाजपा सरकार असामाजिक तत्वों का समर्थन कर रही है, जो आम नागरिकों को भयभीत करने का प्रयास कर रहे हैं. राहुल गांधी ने दीपक को संबोधित करते हुए कहा था कि वह न झुकें, न डरें और संविधान के लिए मजबूती से खड़े रहें.
क्या है कोटद्वार ‘बाबा’ दुकान विवाद?
मामला पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार शहर का है, जहां ‘बाबा’ नाम से एक कपड़ों की दुकान संचालित होती है. दुकान के मालिक एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति हैं. 26 जनवरी को कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दुकान के नाम को लेकर आपत्ति जताई और इसे बदलने की मांग की. उनका तर्क था कि कोटद्वार में सिद्धबली बाबा हिंदुओं के आराध्य देवता हैं, इसलिए इस नाम का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.

इसी दौरान पास में जिम संचालित करने वाले दीपक कुमार कश्यप वहां पहुंचे और दुकानदार के समर्थन में खड़े हो गए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुकान का नाम नहीं बदला जाएगा. जब कार्यकर्ताओं ने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम “मोहम्मद दीपक” बताया. यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई.
राष्ट्रीय स्तर पर उठा मुद्दा
सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद विभिन्न संगठनों के लोग कोटद्वार पहुंचे और विरोध प्रदर्शन हुआ. देखते ही देखते यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन गया. विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे सार्वजनिक मंचों और संसद तक में उठाया.

अब राहुल गांधी की दीपक से मुलाकात के बाद यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के मुद्दे को लेकर व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है.



