देहरादून: भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में वर्ष 2024–2025 के दौरान श्रमिकों को वितरित की गई टूलकिट में सामने आई अनियमितताओं पर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच उप श्रमायुक्त, देहरादून को सौंप दी है। उन्हें 15 दिनों के भीतर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई उस समाचार के बाद हुई, जिसमें मीडिया से बातचीत के दौरान अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पूर्व में टूलकिट एवं अन्य सामग्री वितरण की प्रक्रिया में खामियां रही हैं। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट में यह उजागर हुआ था कि कुछ मामलों में मृतक श्रमिकों के नाम पर भी किट वितरित कर दी गई थी, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए।
श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार अब श्रमिक कल्याण योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। पूर्व की ऑफलाइन प्रणाली को समाप्त कर वितरण प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। वर्तमान में सभी अनुदान “वन क्लिक डीबीटी” प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित किए जा रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बीते छह महीनों में 20 हजार से अधिक पंजीकृत श्रमिकों को डीबीटी के जरिए 51 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई है। सामग्री वितरण के लिए विकसित मोबाइल एप के माध्यम से लाभार्थियों की लाइव फोटो और लोकेशन सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे फर्जीवाड़ा और दोहरे वितरण पर रोक लगी है।
श्रम विभाग द्वारा विकसित लेबर सेस पोर्टल की सराहना केंद्रीय श्रम मंत्री द्वारा भी की गई है और अन्य राज्यों को इसे अपनाने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त श्रमिकों और उनके परिजनों के लिए पूर्व में संचालित ऑफलाइन प्रशिक्षण व्यवस्था को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया गया है। विभाग का दावा है कि इन सुधारों के बाद मुख्यमंत्री पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों में भी कमी दर्ज की गई है।
मीडिया से बातचीत में श्रमायुक्त ने बताया कि पहले सामग्री वितरण जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में या ऑफलाइन पंजीकरण के आधार पर किया जाता था, जहां लाभार्थियों से रजिस्टर में हस्ताक्षर या अंगूठा निशान लिया जाता था। उस व्यवस्था में चयन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें मिलती रही थीं। इसी पृष्ठभूमि में जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी कार्मिक की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
कैग की रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं के संदर्भ में विभाग का कहना है कि कोविड-19 अवधि के दौरान पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। विषम परिस्थितियों में कुछ श्रमिकों अथवा उनके परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना अनिवार्य हो गया था। इस संबंध में संबंधित तथ्य कैग को उपलब्ध करा दिए गए हैं और आगामी ऑडिट में इन मामलों का परीक्षण किया जाएगा।
फिलहाल सभी की निगाहें 15 दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।



