पोस्टमैनों का दर्द! 50 KM दौड़, 10 महीने से तेल का पैसा भी नहीं

 

उत्तराखंड सर्किल में तैनात पोस्टमैनों की समस्याओं को लेकर नेशनल यूनियन ऑफ पोस्टल इम्प्लाइज के सेक्रेटरी जनरल को एक विस्तृत पत्र भेजा गया है। पत्र में डाक वितरण से जुड़े कर्मचारियों को आ रही दिक्कतों और कार्य व्यवस्था में सुधार की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है।

 

यूनियन के जनरल सेक्रेटरी विजेंद्र रावत के मुताबिक उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप अन्य राज्यों की तुलना में काफी अलग है। इसके बावजूद विभाग ने बिना किसी सर्वे के कई जगहों पर आईडीसी सेंटर स्थापित कर दिए हैं। उनका कहना है कि इन केंद्रों के कारण पोस्टमैनों को काम के दौरान अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

उन्होंने बताया कि इन आईडीसी सेंटरों में कर्मचारियों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। डाक की छंटाई का काम भी पोस्टमैनों को खुद ही करना पड़ता है। सीमित संसाधनों के चलते कई बार कर्मचारियों को 40 से 50 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है, जिससे समय पर डाक वितरण करना मुश्किल हो जाता है और काम का दबाव बढ़ जाता है।

 

पोस्टमैनों ने यह भी बताया कि 15 मई 2025 से अब तक उन्हें पेट्रोल और फोन रिचार्ज के लिए मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं किया गया है, जबकि विभाग के पास कर्मचारियों की बैंक डिटेल पहले से मौजूद है। ऐसे में कर्मचारियों ने लंबित भुगतान को जल्द जारी करने की मांग की है।

 

इसके अलावा डिफेन्स, अजबपुर, एसबीआई और हेडक्वार्टर जैसे इलाकों में कार्यक्षेत्र काफी बड़ा होने के कारण वहां अतिरिक्त पोस्टमैन तैनात करने की आवश्यकता बताई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा स्टाफ के साथ इतने बड़े क्षेत्र को संभालना मुश्किल हो रहा है।

 

पोस्टमैनों ने यह भी शिकायत की है कि बीट तय करने का कोई स्थायी मानक नहीं है। अधिकारियों द्वारा बीटों में बार-बार बदलाव किया जाता है, जिससे कर्मचारियों को नई जगहों पर काम करने में परेशानी होती है।

 

वहीं कर्मचारियों के मेडिकल बिल भी लंबे समय से लंबित पड़े हैं। यूनियन ने विभाग से इन बिलों के जल्द निपटान की मांग की है।

 

कर्मचारियों का यह भी कहना है कि सीएल या ईएल लेने की स्थिति में भी उन्हें आसानी से छुट्टी नहीं मिल पाती। आकस्मिक व्यवस्था न होने के कारण कई बार कर्मचारियों को मजबूरी में काम करना पड़ता है। साथ ही जब कोई पोस्टमैन अवकाश पर जाता है तो उसकी बीट को बांट दिया जाता है, जिससे अन्य कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ जाता है।

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