देहरादून, 4 मई 2026/नीरज उत्तराखंडी
उत्तराखण्ड जल संस्थान कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार पर जल संस्थान को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। संघ के प्रदेश महामंत्री नंदलाल जोशी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जल संस्थान से अनावश्यक रूप से पेयजल योजनाएं छीनकर पेयजल निगम को हस्तांतरित किया जा रहा है, जिससे विभाग की कार्यक्षमता और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। संघ ने इसे पक्षपातपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि यह कदम जल संस्थान को कमजोर करने की दिशा में उठाया जा रहा है।
संघ के अनुसार, जल संस्थान ने हमेशा विषम परिस्थितियों में भी पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखा है और विभाग ने कभी भी शासन को असहज स्थिति में नहीं डाला। कर्मचारियों और अभियंताओं ने एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है, जिसके चलते विभाग अपने वित्तीय दायित्वों को भी काफी हद तक स्वयं पूरा करता रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ वर्षों से ‘पैरी अर्बन’ और ‘जल जीवन मिशन’ के नाम पर पेयजल योजनाओं का निर्माण, अनुरक्षण और रखरखाव पेयजल निगम को सौंपा जा रहा है। इतना ही नहीं, जल संस्थान की राजस्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण योजनाएं भी बिना ठोस कारण के निगम को हस्तांतरित की जा रही हैं। सहस्त्रधारा पेयजल योजना इसका प्रमुख उदाहरण बताया गया है।
संघ ने कहा कि इस प्रकार के निर्णयों से कर्मचारियों में रोष और असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूर्व में संचालित सभी पेयजल योजनाएं जल संस्थान को वापस सौंपी जाएं और वर्तमान में संचालित योजनाओं को भी यथावत विभाग में बनाए रखा जाए।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य हो सकते हैं।
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