फर्जीवाड़ा: दूसरे के आयुष्मान कार्ड पर कराया इलाज। FIR दर्ज,अब होगी वसूली

देहरादून, 2 जून 2026। राजधानी देहरादून के सरकारी दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड पर दूसरे मरीज का इलाज कराए जाने के मामले में अस्पताल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रबंधन ने इलाज पर खर्च हुए 1.35 लाख रुपये की वसूली करने का निर्णय लिया है। वहीं आरोपी के खिलाफ पुलिस में मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है।

कैसे हुआ आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग?

जानकारी के अनुसार, मंजीत सिंह निवासी गोविंदगढ़ ने 26 मई को हृदय रोग के उपचार के लिए अपना आयुष्मान कार्ड और बायोमेट्रिक सत्यापन कराया। आरोप है कि इसके बाद उसकी जगह विक्की नामक व्यक्ति को कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती करवा दिया गया और उसका इलाज शुरू करा दिया गया।

मरीज की सभी जांचें की गईं और डॉक्टरों की निगरानी में उसकी एंजियोप्लास्टी भी कर दी गई। मामला तब सामने आया जब उपचार पूरा होने के बाद 29 मई को मंजीत स्वयं आयुष्मान काउंटर पर पहुंचा।

आयुष्मान मित्र की सतर्कता से खुला राज

अस्पताल के आयुष्मान मित्र को दस्तावेजों और मरीज के बीच अंतर नजर आया, जिसके बाद उसने तत्काल अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी दी। प्रारंभिक जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

1.35 लाख रुपये की होगी रिकवरी

दून अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज के इलाज पर करीब 1.35 लाख रुपये खर्च हुए हैं। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह राशि आरोपी से वसूली जाएगी। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक आरोपी इस रकम का भुगतान करने के लिए तैयार है।

उच्चस्तरीय जांच समिति गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

समिति में शामिल हैं—

  • डॉ. विवेकानंद सत्यवाली (अध्यक्ष)
  • डॉ. वंदना बिष्ट
  • डॉ. पवनीश लोहान

समिति को तीन कार्य दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट और सुधारात्मक सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच समिति आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थी सत्यापन, फोटो मिलान, आधार-बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और निगरानी व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करेगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज

अस्पताल प्रशासन की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी मंजीत सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जीवाड़े में कोई अन्य व्यक्ति या कर्मचारी भी शामिल था या नहीं।

दून अस्पताल में सामने आया यह मामला न केवल आयुष्मान योजना की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सत्यापन प्रक्रिया की कमियों को भी उजागर करता है। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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