उत्तराखंड आंदोलनकारी विमला कोटियाल के निधन पर शोक की लहर। बार एसोसिएशन श्रीनगर ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

श्रीनगर गढ़वाल, 5 जून 2026। जयप्रकाश नौगाई 

उत्तराखंड राज्य आंदोलन की सक्रिय सेनानी एवं वरिष्ठ आंदोलनकारी विमला कोटियाल के निधन पर पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन सिंह भंडारी और बार एसोसिएशन श्रीनगर के संरक्षक अनूप श्री पांथरी सहित अधिवक्ताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

बार एसोसिएशन श्रीनगर की ओर से जारी शोक संदेश में कहा गया कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में विमला कोटियाल का योगदान अविस्मरणीय है और राज्य निर्माण की लड़ाई में उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी।

राज्य आंदोलन की मजबूत आवाज थीं विमला कोटियाल

बार एसोसिएशन श्रीनगर के संरक्षक अनूप श्री पांथरी ने कहा कि स्वर्गीय विमला कोटियाल का संघर्षमय जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने उत्तराखंड के हक-हकूक और राज्य निर्माण आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि राज्य के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनका नाम उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा।

अपूर्णीय क्षति: अर्जुन सिंह भंडारी

बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन सिंह भंडारी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि विमला कोटियाल ने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन को मजबूत दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि उनके निधन से प्रदेश ने एक समर्पित आंदोलनकारी और समाजसेवी व्यक्तित्व को खो दिया है। यह क्षति अपूर्णीय है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना

बार एसोसिएशन श्रीनगर ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। अधिवक्ताओं ने कहा कि ईश्वर परिवार को इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे तथा दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

इन अधिवक्ताओं ने व्यक्त किया शोक

विमला कोटियाल के निधन पर शोक व्यक्त करने वालों में संरक्षक अनूप श्री पांथरी, अध्यक्ष प्रमेश चंद्र जोशी, पूर्व अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी, दीपक भंडारी, वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र पाल सिंह रावत, भूपेंद्र पुंडीर, सुबोध भट्ट, प्रदीप मैठाणी, ब्रह्मानंद भट्ट, विवेक जोशी, विकास पंत, परमानंद मैठाणी, देवी प्रसाद खरे, सुनीता भंडारी, आरपी थपलियाल, सुरेंद्र सिंह रौथान, आनंद सिंह बुटोला, सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला, ओम प्रकाश मैठाणी, बलबीर सिंह रौतेला, राजेश जैन, रतन सिंह बिष्ट, नितेश भारती, राखी राय, लक्ष्मीकांत, गौरव उपाध्याय सहित अनेक अधिवक्ता शामिल रहे।

उत्तराखंड आंदोलन की यादों में हमेशा जीवित रहेंगी विमला कोटियाल

उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत बनाने वाली विमला कोटियाल का योगदान प्रदेश के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। उनके निधन को आंदोलनकारियों और समाज के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

Parvatjan Team
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