थराली (चमोली)। चमोली जिले के थराली विकासखंड में मंगलवार को आयोजित क्षेत्र पंचायत बैठक भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की धनराशि के आवंटन में कथित भेदभाव तथा सोलर स्ट्रीट लाइटों की खरीद में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए। लगातार दो घंटे तक चले विरोध और नारेबाजी के बाद ब्लॉक प्रमुख को बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी।
ब्लॉक सभागार में ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित की अध्यक्षता में बैठक शुरू होते ही सदस्य भावना रावत ने क्षेत्र पंचायत निधि, राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग की राशि के वितरण में पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सभी पंचायतों को समान और पारदर्शी आधार पर धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
इसके बाद सदस्य राकेश जोशी ने भी आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। मामला तब और गरमा गया जब सदस्य मनमोहन सिंह रावत ने नारेबाजी करते हुए पीठ के सामने धरना शुरू कर दिया। उनके समर्थन में भावना रावत, भानू प्रकाश फरस्वाण, राकेश जोशी, बबीता और सुमन देवराड़ी भी धरने पर बैठ गए।
सोलर स्ट्रीट लाइट खरीद पर उठे सवाल
बैठक के दौरान सदस्यों ने सोलर स्ट्रीट लाइटों की खरीद में वित्तीय अनियमितता का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि बाजार में लगभग 11 हजार रुपये कीमत वाली सोलर स्ट्रीट लाइटें 16 हजार रुपये में खरीदी गईं और पंचायतों में लगाई गईं। सदस्यों ने इसे सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग से जोड़ते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
हंगामे के बीच ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित, ज्येष्ठ प्रमुख नवनीत रावत, कनिष्ठ प्रमुख राजेश चौहान, जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश चंद्र त्रिपाठी, परियोजना निदेशक आनंद सिंह और खंड विकास अधिकारी नितिन धानिया ने धरने पर बैठे सदस्यों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि विरोध कर रहे सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे और पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना बैठक आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
डीपीआरओ ने दी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी
विवाद बढ़ने पर डीपीआरओ रमेश चंद्र त्रिपाठी ने पंचायत राज अधिनियम की धारा 82 का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय आवंटन नियोजन समिति द्वारा बीडीओ की देखरेख में किया जाता है और बाद में उसे सदन से पारित कराया जाता है।
लेकिन विरोध कर रहे सदस्यों ने आरोप लगाया कि आवंटन का पूरा और विस्तृत विवरण सदन के समक्ष पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाता, जिससे जनप्रतिनिधियों को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं मिल पाती।
हंगामे के दौरान ब्लॉक के लेखाकार ने प्राप्त धनराशि और उसके वितरण का विवरण सदन में पढ़कर सुनाया, लेकिन इससे भी विवाद शांत नहीं हुआ। सदस्यों ने लिखित रूप में पंचायतवार आवंटन और खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
प्रधान संघ ने किया बहिष्कार
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब प्रधान संघ अध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत के आह्वान पर कई प्रधानों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए सदन छोड़ दिया। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के बाहर चले जाने और लगातार जारी गतिरोध के चलते बैठक की कार्यवाही चलाना संभव नहीं हो सका।
अंततः ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने मांग की है कि:
- राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग की धनराशि का पंचायतवार आवंटन सार्वजनिक किया जाए।
- सोलर स्ट्रीट लाइट खरीद की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- भविष्य में सभी वित्तीय प्रस्तावों को सदन के समक्ष पूर्ण विवरण के साथ प्रस्तुत किया जाए।
थराली क्षेत्र पंचायत की यह घटना स्थानीय स्तर पर पंचायती वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कराता है या मामला केवल राजनीतिक विवाद बनकर रह जाता है।






