पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के नैनीडांडा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा बणासी तल्ली में शनिवार सुबह घास काटने गई एक महिला पर गुलदार ने हमला कर दिया।
गुलदार महिला को घसीटते हुए जंगल में ले गया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है, जबकि ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
घास काटने गई महिला पर अचानक किया हमला
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह सुशीला देवी और शांति देवी गांव के ऊपरी जंगल क्षेत्र में घास काटने गई थीं। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक सुशीला देवी पर हमला कर दिया।
हमला इतना तेज था कि महिला को संभलने का मौका भी नहीं मिला। गुलदार उन्हें घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया।
ग्रामीणों ने की तलाश, कुछ दूरी पर मिला शव
घटना के दौरान साथ मौजूद शांति देवी ने शोर मचाकर ग्रामीणों को सूचना दी। आवाज सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और जंगल में महिला की तलाश शुरू की।
काफी देर की तलाश के बाद घटनास्थल से कुछ दूरी पर सुशीला देवी का शव बरामद हुआ। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और भय का माहौल है।
वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और गुलदार की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
वन प्रभाग पौड़ी की एसडीओ आयशा बिष्ट ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में गुलदार की निगरानी के लिए पिंजरे और ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। साथ ही वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में गश्त करेगी।
प्रशिक्षित शूटर भी किया गया तैनात
एसडीओ आयशा बिष्ट ने बताया कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए विभाग ने मौके पर प्रशिक्षित शूटर भी तैनात कर दिया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि फिलहाल कोई भी व्यक्ति अकेले जंगल या सुनसान क्षेत्रों में न जाए। यदि कहीं भी गुलदार दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
ग्रामीणों में आक्रोश, सुरक्षा की मांग
लगातार बढ़ रही वन्यजीवों की गतिविधियों से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को जल्द पकड़ने, क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और खेतों में काम करना अब बेहद जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में विभाग को स्थायी समाधान निकालना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





