नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त प्रभार से संबंधित महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये सभी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
हरीश कुमार गोयल बने देहरादून के नए जिला एवं सत्र न्यायाधीश
हाईकोर्ट के आदेश के तहत पौड़ी गढ़वाल पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल को देहरादून का नया जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वह तत्काल प्रभाव से अपना कार्यभार संभालेंगे।
वहीं, उनके स्थान पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (हरिद्वार) के कानूनी सलाहकार बृजेंद्र सिंह को पौड़ी गढ़वाल पारिवारिक न्यायालय का प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी गई है।
विशेष अदालतों में भी सौंपी गई नई जिम्मेदारियां
हाईकोर्ट ने राज्य की विशेष अदालतों के प्रभावी संचालन के लिए कई न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं।
- नैनीताल के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार को नवगठित विशेष न्यायालय (एनडीपीएस एक्ट) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
- देहरादून के तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक श्रीवास्तव को विशेष न्यायालय-द्वितीय (एनडीपीएस एक्ट) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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पॉक्सो मामलों के लिए भी नई तैनाती
बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों के त्वरित निस्तारण को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने विशेष पॉक्सो अदालतों में भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां तय की हैं।
- देहरादून की एफटीसी/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) कुसुम को नवसृजित विशेष पॉक्सो कोर्ट का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
- ऊधम सिंह नगर की एफटीसी/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) अनीता गुंज्याल को भी जिले के विशेष पॉक्सो न्यायालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हरिद्वार में भी बदली जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने हरिद्वार के पांचवें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण बोहरा को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के कानूनी सलाहकार का अतिरिक्त प्रभार देने की सिफारिश भी राज्य सरकार को भेजी है। यह नियुक्ति राज्य सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगी।
हाईकोर्ट का यह प्रशासनिक फेरबदल राज्य की जिला अदालतों और विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण तथा न्यायिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए तबादलों और अतिरिक्त प्रभारों से विशेष अदालतों की कार्यप्रणाली को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।





