श्रीनगर एन. एच सिरोबगड़ फरासू डेम साइड सडक मार्ग हुआ अवरुध करोड़ो रूपये खर्च होने के बाद भी नहीं हो पाया समाधान

श्रीनगर (गढ़वाल):जयप्रकाश नोगाई  चारधाम यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल श्रीनगर-रुद्रप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) एक बार फिर भूस्खलन की चपेट में आ गया। बुधवार को हल्की बारिश के बाद सिरोबगड़ और फरासू डेम कॉलोनी क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया। सड़क बंद होने से […]

श्रीनगर (गढ़वाल):जयप्रकाश नोगाई 

चारधाम यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल श्रीनगर-रुद्रप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) एक बार फिर भूस्खलन की चपेट में आ गया। बुधवार को हल्की बारिश के बाद सिरोबगड़ और फरासू डेम कॉलोनी क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया। सड़क बंद होने से चारधाम यात्रियों, स्थानीय लोगों और अन्य वाहन चालकों को घंटों तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

विडंबना यह है कि यह स्थिति तब सामने आई है जब प्रदेश में मानसून की शुरुआत ही हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

करोड़ों खर्च, लेकिन नहीं मिला स्थायी समाधान

बताया जा रहा है कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले राष्ट्रीय राजमार्ग खंड श्रीनगर की ओर से सिरोबगड़ और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की लागत से रॉक ट्रीटमेंट और सुरक्षा कार्य कराए गए थे। इन कार्यों का उद्देश्य भूस्खलन की घटनाओं को रोकना और यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था।

हालांकि, पहली ही बारिश में सड़क के फिर बंद हो जाने से इन कार्यों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

कमजोर चट्टानें बनीं सबसे बड़ी चुनौती

जानकारों के अनुसार सिरोबगड़ क्षेत्र की पहाड़ियों में चट्टानों के भीतर की मिट्टी काफी कमजोर है। भू-वैज्ञानिक परीक्षण (Soil Test) में भी यह तथ्य सामने आ चुका है कि यहां की चट्टानें अंदर से मजबूत नहीं हैं। यही कारण है कि हल्की बारिश होते ही मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर खिसककर सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ जाते हैं, जिससे सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रॉक ट्रीटमेंट से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है और इसके लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक उपायों की आवश्यकता होगी।

वैकल्पिक मार्ग नहीं, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच इस मार्ग का कोई प्रभावी वैकल्पिक सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण हाईवे बंद होते ही हजारों यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो जाती है। चारधाम यात्रा के दौरान यह स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन सिरोबगड़ और फरासू क्षेत्र में भूस्खलन की समस्या जस की तस बनी हुई है।

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अधिशासी अभियंता ने क्या कहा?

राष्ट्रीय राजमार्ग खंड श्रीनगर के अधिशासी अभियंता राजवीर सिंह चौहान ने बताया कि संबंधित स्थल पर रॉक ट्रीटमेंट का कार्य अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। जब तक यह कार्य पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक वर्षाकाल में इस क्षेत्र में भूस्खलन और सड़क बाधित होने की संभावना बनी रहेगी।

उन्होंने यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें। बारिश के दौरान पहाड़ियों से अचानक पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है, जिससे वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

बारिश के मौसम में बढ़ सकती है चुनौती

मानसून की शुरुआत में ही राष्ट्रीय राजमार्ग के बार-बार बंद होने की घटनाओं ने प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो चारधाम यात्रा के चरम समय में हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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