श्रीनगर गढ़वाल: उत्तराखंड राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अधिवेशन-2026 के दौरान प्रदेश के 4,200 अतिथि शिक्षकों ने दो दिनों तक राज्य के माध्यमिक विद्यालयों की पूरी जिम्मेदारी संभाली। 17 और 18 जुलाई को नियमित शिक्षक अधिवेशन एवं चुनाव प्रक्रिया में शामिल रहे, जबकि विद्यालयों में पठन-पाठन, अनुशासन और दैनिक गतिविधियों का संचालन अतिथि शिक्षकों ने पूरी निष्ठा के साथ किया।
13 जिलों के माध्यमिक विद्यालयों में संभाली कमान
शिक्षा निदेशालय द्वारा शिक्षक संघ के प्रांतीय अधिवेशन में भाग लेने के लिए नियमित शिक्षकों को दो दिन का अवकाश दिए जाने के बाद प्रदेश के सभी 13 जिलों के माध्यमिक विद्यालयों का संचालन अतिथि शिक्षकों के भरोसे रहा।
अतिथि शिक्षकों ने न केवल नियमित कक्षाओं का संचालन किया, बल्कि विद्यालयों में अनुशासन, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और अन्य दैनिक व्यवस्थाओं को भी सुचारु रूप से संभाला। इससे दो दिनों तक प्रदेश के अधिकांश सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं हुआ।
11 साल की सेवा, फिर भी अल्प मानदेय पर काम
उत्तराखंड में वर्ष 2015 से कार्यरत अतिथि शिक्षक लगातार सीमित मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में भी वे नियमित रूप से विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि 11 वर्षों की सेवा पूरी होने के बावजूद आज भी उन्हें कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है। उनका कहना है कि वे अपने विषय के साथ-साथ विद्यालय की अन्य शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
सरकार से भविष्य सुरक्षित करने की मांग तेज
इस मुद्दे पर शिक्षा सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी ने कहा कि उत्तराखंड के सभी अतिथि शिक्षक बेहतर कार्य कर रहे हैं और सरकार उनके भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच रखती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अतिथि शिक्षकों के हित में जल्द ही ठोस निर्णय लिया जाएगा।
वहीं, उत्तराखंड अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरीश धामी ने कहा कि सरकार को अब अतिथि शिक्षकों के भविष्य को लेकर शीघ्र सकारात्मक और स्थायी फैसला लेना चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय और रोजगार सुरक्षा मिलनी चाहिए।
प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों को अब सरकार के फैसले का इंतजार है। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार योगदान देने के बावजूद उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब इन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।






