देहरादून:नीरज उत्तराखंडी
उत्तराखंड के देहरादून जिले में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) की अधूरी पेयजल योजनाओं को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों के प्रति सख्त रुख अपनाया है।
उन्होंने सभी लंबित परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप योजनाओं की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित की जाए, ताकि शेष केंद्रीय सहायता समय पर प्राप्त हो सके।
जल जीवन मिशन फेज-2 की योजनाएं जल्द पूरी करने के निर्देश
मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की समीक्षा बैठक में डीएम ने जल जीवन मिशन के फेज-2 के तहत लंबित पेयजल योजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) समय पर कराने और ‘हर घर जल’ प्रमाणन की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी जोर दिया।
डीएम ने कहा कि जिन परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, उनका निरीक्षण और वित्तीय समापन बिना किसी देरी के किया जाए।
ग्राम समितियां न बनने पर ADO (पंचायत) के वेतन पर रोक
बैठक के दौरान विकासखंड चकराता और सहसपुर के कई गांवों में ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों का गठन नहीं होने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई।
उन्होंने संबंधित सहायक विकास अधिकारियों (ADO पंचायत) के वेतन आहरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी ग्राम पंचायतों में समितियों का पुनर्गठन कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश भी जारी किए।
‘हर घर जल’ प्रमाणन में तेजी लाने पर जोर
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन गांवों में पेयजल योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, वहां ‘हर घर जल’ प्रमाणन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए, ताकि ग्रामीणों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि जनपद के 635 गांवों में से 596 गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणन मिल चुका है, जबकि 33 गांवों में यह प्रक्रिया अभी लंबित है।
फेज-2 की 760 योजनाओं में से 734 पूरी
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले के 1,29,491 ग्रामीण परिवारों में से 1,29,449 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
- फेज-1 की सभी 333 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
- फेज-2 की कुल 760 योजनाओं में से 734 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
- 26 योजनाओं पर अभी कार्य जारी है।
- इनमें से 3 परियोजनाएं वन भूमि स्वीकृति के अभाव में लंबित हैं।
इसके अलावा 426 परियोजनाओं में से 281 का थर्ड पार्टी निरीक्षण और 121 परियोजनाओं का वित्तीय समापन भी पूरा हो चुका है।
616 करोड़ की परियोजनाओं पर चल रहा काम
जल जीवन मिशन के दूसरे चरण की परियोजनाओं की कुल लागत 616.33 करोड़ रुपये है। इनमें अब तक 408.04 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 208.29 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता अभी प्राप्त होना शेष है।
समीक्षा बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालय निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने जिला पंचायत के समन्वय से ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण के लिए रूट चार्ट तैयार कर वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जल निगम एवं जल संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, जिला विकास अधिकारी तथा जिला जल एवं स्वच्छता मिशन से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।






