देहरादून। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस (सतर्कता अधिष्ठान) की लगातार कार्रवाई के बावजूद कई बड़े मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया शासन स्तर पर अटक गई है। विजिलेंस ने खुलासा किया है कि प्राथमिक गोपनीय जांच में दोषी पाए गए करीब 40 भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) के लिए भेजी गई फाइलें लंबे समय से सचिवालय में लंबित हैं। शासन से मंजूरी नहीं मिलने के कारण इन मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं हो पा रही है।
यह खुलासा विजिलेंस निदेशक एवं अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) वी. मुरुगेशन ने गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान किया।
एडीजी वी. मुरुगेशन ने कहा कि विजिलेंस ने अपनी प्राथमिक जांच पूरी कर इन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए हैं और नियमानुसार अभियोजन स्वीकृति के लिए फाइलें शासन को भेज दी गई हैं। लेकिन स्वीकृति मिलने में हो रही देरी के कारण आरोपित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन स्तर से जल्द निर्णय लिया जाएगा ताकि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
चार वर्षों में 103 रिश्वतखोर गिरफ्तार, निचले स्तर के कर्मचारी सबसे ज्यादा पकड़े गए
विजिलेंस के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2023 से जुलाई 2026 तक राज्यभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान 89 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए गए, जिनमें 103 सरकारी कार्मिकों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सिर्फ 17 राजपत्रित (गजटेड) अधिकारी शामिल हैं, जबकि 86 अराजपत्रित कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए। यानी भ्रष्टाचार के मामलों में निचले स्तर के कर्मचारी अधिकारियों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक पकड़े गए हैं।
2024 में सबसे ज्यादा हुई ट्रैप कार्रवाई
विजिलेंस के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2024 भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई के लिहाज से सबसे सक्रिय वर्ष रहा। इस दौरान 31 ट्रैप ऑपरेशन किए गए, जिनमें 38 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो—
- 2023: 18 ट्रैप, 20 गिरफ्तारियां
- 2024: 31 ट्रैप, 38 गिरफ्तारियां
- 2025: 22 ट्रैप, 26 गिरफ्तारियां
- 2026 (अब तक): 18 ट्रैप, 19 गिरफ्तारियां
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तराखंड में रिश्वतखोरी के खिलाफ विजिलेंस लगातार सक्रिय अभियान चला रही है।
गवाहों के मुकरने से कमजोर पड़ रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे
विजिलेंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अदालतों में आरोपियों को सजा दिलाना बनती जा रही है। एडीजी वी. मुरुगेशन ने बताया कि कई मामलों में पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद सरकारी गवाह अदालत में अपने पूर्व बयानों से पलट जाते हैं। इसका लाभ बचाव पक्ष को मिलता है और आरोपी बरी हो जाते हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 15 मामलों में दोषसिद्धि हुई थी, लेकिन 2024 में यह संख्या घटकर आठ रह गई। वहीं 2025 में केवल तीन मामलों में ही सजा हो सकी। लगातार घटती दोषसिद्धि दर विजिलेंस के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
उन्होंने बताया कि जिन मामलों में आरोपी बरी हुए हैं, उनकी विस्तृत समीक्षा कराई जा रही है। यदि कोई सरकारी कर्मचारी जानबूझकर अदालत में बयान बदलता पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी।
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विजिलेंस को मिले 20 नए पद
भ्रष्टाचार की जांच को और अधिक प्रभावी तथा तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने विजिलेंस में 20 नए पदों को मंजूरी दी है। इनमें वरिष्ठ सतर्कता अधिकारी, क्षेत्राधिकारी (सीओ), सहायक अभियंता, वित्तीय विशेषज्ञ, आईटी इंजीनियर, कानूनगो, ड्राफ्ट्समैन-सर्वेयर तथा कंप्यूटर प्रोग्रामर जैसे विशेषज्ञ पद शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त तकनीकी विशेषज्ञों की अनुबंध के आधार पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि डिजिटल एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में मामलों को अधिक मजबूती से प्रस्तुत किया जा सके।
जनता से भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे आने की अपील
एडीजी वी. मुरुगेशन ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी एजेंसियों की नहीं बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो उसकी सूचना तुरंत विजिलेंस के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 पर दें। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और हर शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती है।
प्रेसवार्ता के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने कार्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
उत्तराखंड में विजिलेंस लगातार रिश्वतखोरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े भी जा रहे हैं। इसके बावजूद करीब 40 मामलों में अभियोजन स्वीकृति का सचिवालय में लंबित रहना भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान की गति पर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में अब निगाहें शासन के फैसले पर टिकी हैं कि इन लंबित फाइलों पर कब मंजूरी मिलती है और दोषियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।






