पुरोला, 25 जुलाई 2026। नीरज उत्तराखंडी
रंवाई घाटी के रामा और कमल सिरांई क्षेत्र में टमाटर उत्पादक किसान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मंडियों में टमाटर के दाम गिरकर मात्र दो से तीन रुपये प्रति किलो रह जाने से किसानों ने तैयार फसल को तोड़ना तक बंद कर दिया है। कई किसान सैकड़ों क्विंटल टमाटर खेतों में ही छोड़ने और गदेरों में फेंकने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत, महंगे बीज, खाद, दवाइयों और सिंचाई पर भारी खर्च करने के बाद भी उन्हें उत्पादन लागत तक नहीं मिल रही है।
हालत यह है कि मंडियों तक टमाटर पहुंचाने में लगने वाला ट्रक किराया और मजदूरी भी बिक्री से मिलने वाली रकम से अधिक पड़ रही है। ऐसे में फसल बेचने के बजाय उसे खेतों में छोड़ देना ही कम नुकसान का सौदा बन गया है।
टमाटर उत्पादक किसान हरदेव सिंह, प्रदीप सिंह, धर्मेंद्र, सोवेंद्र सिंह और राजेंद्र सिंह ने बताया कि एक ओर बाजार में दाम लगातार गिर रहे हैं, दूसरी ओर परिवहन और मजदूरी की लागत बढ़ती जा रही है। इससे खेती घाटे का सौदा बन गई है।
किसानों के सामने अब बीज, खाद और दवाइयों का उधार चुकाने के साथ-साथ कृषि ऋण की किस्तें जमा करने का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो अगले सीजन में टमाटर की खेती करना मुश्किल हो जाएगा। उनका आरोप है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार की ओर से कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- टमाटर का समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया जाए।
- पुरोला क्षेत्र में स्थानीय खरीद केंद्र खोले जाएं।
- मंडियों तक उपज पहुंचाने के लिए परिवहन पर अनुदान दिया जाए।
- नुकसान झेल रहे किसानों को आर्थिक राहत पैकेज उपलब्ध कराया जाए।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हजारों परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट गहरा जाएगा। किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर टमाटर उत्पादकों को राहत देने की मांग की है।






