देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी बीच पार्टी के एक आंतरिक सर्वे को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, सर्वे में भाजपा के कई मौजूदा विधायकों के प्रति स्थानीय स्तर पर नाराजगी दर्ज की गई है। माना जा रहा है कि इसी फीडबैक के आधार पर पार्टी आगामी चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर बड़े फैसले ले सकती है।
आज नई दिल्ली में भाजपा उत्तराखंड प्रदेश कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गयी हैं। बैठक का नेतृत्व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी.एल. संतोष करेंगे।
बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट समेत प्रदेश कोर ग्रुप के सभी सदस्य शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा होगी। यही पर पार्टी नेतृत्व तय कर सकता है कि किसका टिकट बचेगा और किसका कटेगा!
32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय नाराजगी की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर कराए गए फीडबैक में करीब 32 मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि पार्टी नहीं चाहती कि जनप्रतिनिधियों के प्रति असंतोष का असर विधानसभा चुनाव 2027 में उसके प्रदर्शन पर पड़े। ऐसे में जिन सीटों पर नाराजगी अधिक है, वहां नए चेहरों को मौका देने पर विचार किया जा सकता है।
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में सरकार के कार्यों को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक माहौल है, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन को लेकर असंतोष सामने आया है।
फीडबैक में यह भी कहा गया है कि पिछले वर्षों में विकास कार्य हुए हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में प्रशासनिक सुस्ती, स्थानीय समस्याओं और युवाओं की अपेक्षाओं को लेकर नाराजगी महसूस की गई है। पार्टी इन मुद्दों पर समय रहते काम करने की रणनीति बना रही है।
70 विधानसभा सीटों से जुटाया गया फीडबैक
सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों के दौरान प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, सामाजिक प्रतिनिधियों और आम लोगों से विभिन्न माध्यमों के जरिए फीडबैक लिया गया। इसके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पार्टी नेतृत्व को सौंपी गई है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर संगठन और चुनावी रणनीति में बदलाव की संभावनाओं पर मंथन चल रहा है।
मुख्यमंत्री धामी की सीट को लेकर भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए आगामी चुनाव में एक सुरक्षित विधानसभा सीट के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
ताकि वो अपनी सीट पर चुनाव प्रचार में उलझने के बजाय प्रदेश भर में प्रचार प्रसार कर पाए और चुनाव में भाजपा की हैट्रिक में अहम भूमिका निभा पाए।
हारी हुई सीटों पर भी भाजपा का फोकस
सूत्रों के अनुसार, पिछली विधानसभा चुनाव में भाजपा जिन 23 सीटों पर पराजित हुई थी, उनमें से करीब 10 सीटों पर इस बार स्थिति बेहतर होने की संभावना जताई गई है। पार्टी इन सीटों पर संगठन को और मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तराखंड की राजनीति में चुनावी नतीजों पर विपक्ष की मजबूती या कमजोरी से अधिक असर स्थानीय उम्मीदवारों की छवि और क्षेत्रीय समीकरणों का होता है।
इसी वजह से भाजपा इस बार उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय फीडबैक और जनस्वीकृति को प्रमुख आधार बना सकती है।







