बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं :सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग भगवान भरोसे, प्रसव के लिए 82 किमी तक का सफर करने की मजबूरी

पुरोला, 6 अगस्त। नीरज उत्तराखंडी  हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले के दुर्गम आराकोट-बंगाण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली लगातार गंभीर होती जा रही है। आराकोट और टिकोची के सरकारी अस्पताल वर्षों से चिकित्सकों और आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं, जिसका सबसे अधिक खामियाजा गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और […]

पुरोला, 6 अगस्त। नीरज उत्तराखंडी 
हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले के दुर्गम आराकोट-बंगाण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली लगातार गंभीर होती जा रही है। आराकोट और टिकोची के सरकारी अस्पताल वर्षों से चिकित्सकों और आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं, जिसका सबसे अधिक खामियाजा गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से लगभग 207 किलोमीटर दूर स्थित इस दुर्गम क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग भगवान भरोसे चल रही है। टिकोची एलोपैथिक अस्पताल में केवल एक चिकित्सक तैनात है, जबकि वार्ड बॉय, स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।

वहीं टिकोची से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित आराकोट अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं। यहां चिकित्सक सहित अन्य आवश्यक स्टाफ का अभाव है। इस अस्पताल पर क्षेत्र की लगभग 22 ग्राम पंचायतों के 35 गांवों की आबादी निर्भर है, लेकिन सामान्य उपचार से लेकर प्रसव जैसी आपातकालीन सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

महिला विशेषज्ञ चिकित्सक की अनुपलब्धता के कारण प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को मजबूरी में 15 किलोमीटर दूर त्यूणी, 32 किलोमीटर दूर रोहड़ू, 42 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी अथवा 82 किलोमीटर दूर उप जिला चिकित्सालय पुरोला ले जाना पड़ता है। दुर्गम सड़कें और लंबी दूरी कई बार मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।

क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन चौहान, राजेंद्र चौहान, नरेश सिंह और राजेंद्र नौटियाल ने बताया कि टिकोची और आराकोट अस्पतालों में आज तक महिला विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को निजी वाहनों के सहारे लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की भारी समस्या उत्पन्न होती है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.सी. आर्य ने बताया कि टिकोची चिकित्सालय में वर्तमान में एक चिकित्सक तैनात है। आराकोट अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक का लगभग एक माह पूर्व स्थानांतरण हो गया था, जिसके बाद अभी तक नए चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए उच्च स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार से आराकोट और टिकोची अस्पतालों में चिकित्सकों, महिला विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की शीघ्र नियुक्ति कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाने की मांग की है।

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