नौगांव (उत्तरकाशी)। नीरज उत्तराखंडी
नौगांव क्षेत्र के सौली गांव में भूधंसाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बीते दिनों हुई भारी बारिश के बाद गांव में कई मकानों में दरारें आने और जमीन धंसने से करीब 11 परिवार प्रभावित हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इनमें से चार परिवार अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के बाद क्षेत्र में भूधंसाव की स्थिति और गंभीर हुई है। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान पहाड़ी की कटिंग और भूगर्भीय स्थिरता से जुड़े पहलुओं की पर्याप्त जांच नहीं होने के कारण अब इसका खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
कई मकानों में आईं दरारें
भूधंसाव के कारण गांव के कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं। कुछ घरों की नींव तक प्रभावित होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार पीतांबर बडोनी का मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके अलावा अन्य कई परिवारों के मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से वर्षों में घर बनाए थे, लेकिन भूधंसाव के चलते अब इन घरों में रहना खतरे से खाली नहीं है। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर विस्थापन तथा तत्काल राहत की मांग की है।
छह सदस्यीय परिवार ने भी छोड़ा घर
प्रभावित बसंती देवी के छह सदस्यों वाले परिवार ने भी अगस्त में अपना घर खाली कर दिया। परिवार का कहना है कि मकान में आई दरारों और जमीन के लगातार खिसकने के कारण उन्हें सुरक्षा की चिंता सताने लगी थी। ग्रामीणों ने बताया कि कई परिवार फिलहाल रिश्तेदारों अथवा अन्य सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं भूगर्भीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि भूधंसाव प्राकृतिक कारणों से हो रहा है या यमुनोत्री हाईवे चौड़ीकरण के दौरान हुई पहाड़ी कटिंग और निर्माण कार्यों से इसका संबंध है।
प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम भेजकर पूरे क्षेत्र का सर्वे कराया जाए, खतरे की जद में आए मकानों को चिह्नित किया जाए और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त मकानों और संपत्ति का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यदि हाईवे चौड़ीकरण अथवा निर्माण कार्यों की भूमिका सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर प्रभावित परिवारों को उचित राहत दी जानी चाहिए।







