- बजट स्वीकृत, टेंडर और अनुबंध भी पूरा, फिर भी मौके पर शुरू नहीं हुआ काम; मानसून में बढ़ी चिंता
बड़कोट (उत्तरकाशी), 24 अगस्त 2026।नीरज उत्तराखंडी
यमुनोत्री धाम को बाढ़ और आपदा के खतरे से बचाने के लिए स्वीकृत 21.5 करोड़ रुपये की बाढ़ सुरक्षा योजना सरकारी कार्यप्रणाली और निर्माण में हो रही देरी के चलते सवालों के घेरे में आ गई है। बजट स्वीकृत होने के साथ टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और करीब दो माह पहले निर्माण एजेंसी के साथ अनुबंध भी हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
यमुनोत्री धाम और जानकीचट्टी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा कार्यों में हो रही देरी को लेकर स्थानीय लोगों और मंदिर समिति से जुड़े लोगों में चिंता है। खासकर मानसून के दौरान क्षेत्र में बाढ़, अतिवृष्टि और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में करोड़ों रुपये की योजना स्वीकृत होने के बावजूद धरातल पर काम शुरू न होना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
2024 की आपदा ने दिखाई थी क्षेत्र की संवेदनशीलता
जुलाई 2024 में आई भीषण आपदा के दौरान यमुनोत्री धाम से लेकर जानकीचट्टी तक अतिवृष्टि और बाढ़ ने व्यापक नुकसान पहुंचाया था। कई स्थानों पर सड़क, पैदल मार्ग, सुरक्षा ढांचे और अन्य आधारभूत सुविधाएं प्रभावित हुई थीं। आपदा के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं से धाम और यात्रा मार्ग को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बाढ़ सुरक्षा कार्यों की आवश्यकता महसूस की गई।
इसी के तहत सिंचाई विभाग की ओर से बाढ़ सुरक्षा योजना तैयार की गई। शुरुआत में इसके लिए करीब 18 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन विभाग ने इसे प्रस्तावित कार्यों के लिए अपर्याप्त बताया। इसके बाद शासन स्तर से योजना की धनराशि बढ़ाकर 21.5 करोड़ रुपये कर दी गई।
धनराशि बढ़ने के बाद योजना को लेकर उम्मीद जगी कि यमुनोत्री धाम क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हुई और करीब दो माह पूर्व निर्माण एजेंसी के साथ अनुबंध कर दिया गया। इसके बावजूद निर्माण स्थल पर अब तक काम शुरू नहीं हो सका है।
मानसून में देरी पर उठ रहे सवाल
यमुनोत्री क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। मानसून के दौरान तेज बारिश के साथ नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन की घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे समय में बाढ़ सुरक्षा कार्यों में देरी स्थानीय लोगों के साथ ही यात्रा व्यवस्थाओं के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा के बाद जब सुरक्षा कार्यों की आवश्यकता सामने आई थी, तब योजना को जल्द धरातल पर उतारने की जरूरत थी। यदि मानसून शुरू होने से पहले निर्माण कार्य की तैयारी पूरी कर ली जाती तो संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकता था।
यात्रा के दूसरे चरण से पहले बढ़ी चिंता
सितंबर से चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। यमुनोत्री धाम में भी यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में यदि सुरक्षा कार्य शुरू नहीं होते हैं तो स्थानीय लोगों और यात्रा से जुड़े कारोबारियों को संभावित आपदा की चिंता सता रही है।
यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने कहा कि वर्ष 2024 की आपदा से सबक लेते हुए धाम की सुरक्षा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए। धाम और यात्रा मार्ग की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा कार्यों में किसी तरह की देरी उचित नहीं है।
विभाग ने बरसात को बताया कारण
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय राज ने बताया कि बरसात के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसी मशीनरी को मौके पर पहुंचाने की तैयारी कर रही है। मौसम अनुकूल होते ही कार्य शुरू कराया जाएगा।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की योजना, प्रशासनिक स्वीकृति, टेंडर और अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य धरातल पर कब शुरू होगा। 2024 की आपदा की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से बनाई गई योजना यदि आपदा के खतरे वाले मौसम में ही अटकी रहे, तो इसका लाभ जरूरत के समय कैसे मिलेगा—यह सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।


