देहरादून/हल्द्वानी।कार्तिक उपाध्याय
उत्तराखंड के कृषि और उद्यान विभाग से जुड़ी योजनाओं में खरीद, अनुदान, भुगतान और सरकारी राजस्व को लेकर किसान मंच उत्तराखंड ने अपने आरोपों का दायरा बढ़ाते हुए अब सीधे सरकार और विभाग के शीर्ष स्तर को चुनौती दी है।
किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी, कृषि सचिव से लेकर विभागीय अधिकारी तक—जिसे भी मंच के आरोप गलत लगते हैं, वह सरकारी रिकॉर्ड के साथ सामने आए।
उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक वर्तमान में पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री और गणेश जोशी कृषि एवं उद्यान विभाग के मंत्री हैं। कृषि एवं कृषक कल्याण सचिव के रूप में डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडेय तथा महानिदेशक कृषि एवं उद्यान विभाग के रूप में वंदना सिंह का नाम दर्ज है। कृषि निदेशक दिनेश कुमार हैं।
किसान मंच का दावा है कि उसके पास कृषि एवं उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं और प्रकरणों से संबंधित ऐसे दस्तावेज और अभिलेख हैं, जिनके आधार पर करीब ₹500 से ₹600 करोड़ से अधिक की संभावित राजस्व चोरी और सरकारी धन के दुरुपयोग की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की जरूरत है। हालांकि यह रकम फिलहाल किसान मंच का दावा है; किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय ने ₹500–600 करोड़ की अनियमितता स्थापित नहीं की है।
किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा, “हम किसी बंद कमरे में आरोप लगाने की बात नहीं कर रहे। मुख्यमंत्री हों, कृषि-उद्यान मंत्री हों, सचिव हों, निदेशक हों या संबंधित अधिकारी—सरकार जिसे चाहे सामने बैठा दे। हम अपने दस्तावेज रखेंगे और सरकार अपना रिकॉर्ड रखे। फिर उत्तराखंड की जनता के सामने तय हो कि दस्तावेज क्या कहते हैं।”
उन्होंने कहा कि मामला किसी एक योजना या जिले तक सीमित बताकर समाप्त नहीं किया जा सकता। किसान मंच कृषि और उद्यान क्षेत्र में बीज एवं सामग्री खरीद, अनुदान, लाभार्थी चयन, DBT, फर्मों को भुगतान, गुणवत्ता परीक्षण, जियो-टैगिंग, ई-वे बिल, आपूर्ति और सरकारी राजस्व से संबंधित रिकॉर्ड की समग्र जांच की मांग कर रहा है।
उपाध्याय ने कहा कि किसानों के नाम पर सरकारी खजाने से धन खर्च हुआ है तो उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। किस योजना में कितना बजट आया, किस फर्म को कितना भुगतान किया गया, किन किसानों को लाभार्थी बनाया गया, सामग्री कहां से खरीदी गई, उसकी गुणवत्ता किस स्तर पर जांची गई और वास्तविक लाभ किसान तक पहुंचा या नहीं—इन सवालों के जवाब सरकारी अभिलेखों में मौजूद होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “सरकार हमारे ₹500–600 करोड़ के दावे को गलत मानती है तो इससे आसान रास्ता क्या होगा—स्वतंत्र जांच करा दीजिए। जांच में हमारा दावा गलत निकलता है तो वह भी प्रदेश की जनता के सामने आ जाएगा और यदि सरकारी धन या राजस्व का नुकसान सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।”
किसान मंच प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कृषि मंत्री गणेश जोशी से इस पूरे मामले पर विभागीय स्तर से ऊपर उठकर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गणेश जोशी के पास कृषि के साथ उद्यान एवं कृषि प्रसंस्करण तथा उद्यान एवं फल उद्योग विभाग भी हैं।
उपाध्याय ने कहा, “हमारी चुनौती बिल्कुल साफ है—सरकार तारीख तय करे, स्थान तय करे और अपने अधिकारियों को पूरे रिकॉर्ड के साथ बैठाए। हम भी दस्तावेज लेकर पहुंचेंगे। किसानों के नाम पर खर्च हुए एक-एक रुपये और सरकार को मिलने वाले राजस्व का हिसाब दस्तावेजों के सामने रखा जाए।”
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य जांच से पहले किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं है। मंच चाहता है कि आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच हो तथा जांच में जिसकी जो भूमिका सामने आए, उसी आधार पर जवाबदेही तय की जाए।
“अब सवाल केवल किसान मंच का नहीं है। सवाल उत्तराखंड के किसानों के नाम पर खर्च हुए सार्वजनिक धन का है। ₹500–600 करोड़ का दावा हमने किया है—सरकार जांच कराए और वास्तविक आंकड़ा जनता के सामने रखे। हम दस्तावेज रखने को तैयार हैं, क्या सरकार जवाब रखने को तैयार है?” उपाध्याय ने कहा।


