देहरादून: उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड की एक और उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है।
उत्तराखंड की इस सीट का प्रतिनिधित्व वर्तमान में भाजपा सांसद नरेश बंसल कर रहे हैं, जिनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए 29 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। 6 अक्टूबर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख होगी, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। मतदान का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तकनिर्धारित किया गया है। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी की जानी है।
राज्यसभा चुनाव का पूरा कार्यक्रम
- 29 सितंबर: चुनाव की अधिसूचना
- 6 अक्टूबर: नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख
- 7 अक्टूबर: नामांकन पत्रों की जांच
- 9 अक्टूबर: नाम वापसी की अंतिम तारीख
- 16 अक्टूबर: सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान
- 16 अक्टूबर: शाम 5 बजे से मतगणना
- 19 अक्टूबर: चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की निर्धारित समयसीमा
नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को होगा पूरा
उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। अब उनकी सीट के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम जारी किया गया है; उम्मीदवारों को लेकर आधिकारिक प्रक्रिया नामांकन के साथ आगे बढ़ेगी।
यह चुनाव राज्य की राजनीति में खास महत्व रखता है, क्योंकि यह सीट लंबे समय से भाजपा के कब्जे में रही है।
यूपी की 10 सीटों पर भी चुनाव
उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भी 16 अक्टूबर को मतदान होगा। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है।
इनमें अरुण सिंह, गीता एलायंस चन्द्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रो. राम गोपाल यादव, रामजी, बीएल वर्मा, सीमा, डॉ. दिनेश शर्मा और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं। डॉ. दिनेश शर्मा ने 11 सितंबर को इस्तीफा दे दिया था, जिससे एक सीट पहले ही खाली हो गई थी।
उत्तराखंड की इस सीट पर चुनाव परिणाम राज्य की सत्ताधारी और विपक्षी दलों दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।


