देहरादून, 23 सितंबर।नीरज उत्तराखंडी
अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए जारी की गई करीब 11 करोड़ 92 लाख 58 हजार रुपये की धनराशि को लेकर शासन-प्रशासन के स्तर पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। निदेशालय स्तर से तीन जिलों के लिए अवमुक्त धनराशि को अग्रिम आदेश तक कार्यदायी संस्था अथवा क्रियान्वयन एजेंसी को आगे जारी या वितरित नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी बीच चकराता क्षेत्र में एससीपी-टीएसपी योजनाओं में कथित कमीशनखोरी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों ने मामले को और तूल दे दिया है।
निदेशालय के पत्र के अनुसार 16 सितंबर को देहरादून जिले के लिए 11 करोड़ 42 लाख 61 हजार रुपये, ऊधमसिंह नगर के लिए 26 लाख 29 हजार रुपये तथा पिथौरागढ़ के लिए 23 लाख 68 हजार रुपये अवमुक्त किए गए थे। तीनों जिलों को मिलाकर यह राशि करीब 11.92 करोड़ रुपये है। अब इस राशि को आगे वितरित नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
राशि जारी होने के बाद रोक ने खड़े किए सवाल
धनराशि पहले अवमुक्त की गई और उसके बाद उसके आगे वितरण पर रोक लगाए जाने से योजनाओं की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि उपलब्ध आदेश में रोक के पीछे कमीशनखोरी के आरोपों को कारण बताए जाने की पुष्टि नहीं होती, लेकिन इसी अवधि में चकराता में एससीपी-टीएसपी योजनाओं को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों के कारण पूरे प्रकरण पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।
सवाल यह भी है कि जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के विकास के लिए बजट जारी किया जाता है तो उसके आवंटन और कार्यों के चयन में पारदर्शिता के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई? योजनाओं के प्रस्ताव किस आधार पर स्वीकृत हुए और कार्यदायी संस्थाओं को काम आवंटित करने के क्या मानक रहे?
मंत्री आवास के बाहर धरना, उठे गंभीर आरोप
20 सितंबर को कैबिनेट मंत्री खजान दास के यमुना कॉलोनी स्थित आवास के बाहर हुए धरने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया। धरने में मधु चौहान, गीता राम गौड़, मूरत राम शर्मा, प्रताप राव, कमलेश भट्ट समेत भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए थे।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चकराता विधानसभा क्षेत्र में एससीपी-टीएसपी की योजनाओं में भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से दिए गए प्रस्तावों की अनदेखी कर कांग्रेस से जुड़े लोगों को काम दिए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान योजनाओं की स्वीकृति में 15 से 20 प्रतिशत कमीशन लिए जाने और करीब 80 प्रतिशत कार्य विपक्ष अथवा कांग्रेस से जुड़े लोगों को दिए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अथवा स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए कमीशनखोरी के आरोपों को फिलहाल प्रदर्शनकारियों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मंत्री ने आरोपों को किया खारिज
मंत्री खजान दास ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योजनाओं का बजट बिना भेदभाव उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। ऐसे में अब विवाद का असली केंद्र यह बन गया है कि योजनाओं के चयन और कार्य आवंटन में निर्धारित प्रक्रिया का कितना पालन हुआ और क्या सभी प्रस्तावों के साथ समान व्यवहार किया गया।
कांग्रेस ने भी भाजपा को घेरा
धरने और आरोपों के बाद कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस की ओर से योजनाओं में कथित कमीशनखोरी और ठेके आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यानी जिस बजट का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में सड़क, भवन, पेयजल और अन्य अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करना है, वही बजट अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में है।
अब जांच से साफ हो सकता है पूरा सच
मामले में सबसे अहम प्रश्न यही है कि क्या एससीपी-टीएसपी योजनाओं के प्रस्ताव और कार्य आवंटन निर्धारित नियमों के अनुसार हुए? यदि सब कुछ प्रक्रिया के अनुरूप हुआ है तो संबंधित विभाग के पास प्रस्तावों, स्वीकृतियों और कार्य आवंटन का पूरा रिकॉर्ड मौजूद होना चाहिए। वहीं यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दस्तावेजी जांच से उसकी वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
अभी तक उपलब्ध जानकारी में कमीशनखोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन करीब 11.92 करोड़ रुपये की राशि के आगे वितरण पर रोक और उसी दौरान सामने आए राजनीतिक आरोपों ने पारदर्शिता तथा कार्य आवंटन की प्रक्रिया को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन अथवा संबंधित निदेशालय इस पूरे प्रकरण की दस्तावेजी जांच कराता है या नहीं, और यदि जांच होती है तो एससीपी-टीएसपी योजनाओं में प्रस्ताव से लेकर स्वीकृति, बजट आवंटन और ठेका/कार्य आवंटन तक की प्रक्रिया में क्या सामने आता है।
बड़ा सवाल:
आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए जारी बजट वास्तव में विकास कार्यों तक पहुंच रहा है या राजनीतिक खींचतान और कथित कमीशन के आरोपों के बीच उलझ रहा है?


