- पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा, मशीनें जब्त और मुकदमा दर्ज; लकड़ी मौके से गायब होने पर वन विभाग की भूमिका भी सवालों में
विकासनगर।नीरज उत्तराखंडी
हरबर्टपुर क्षेत्र में तीन दर्जन से ज्यादा हरे-भरे फलदार पेड़ों पर आरी चलाकर उन्हें धराशायी कर दिया गया। रात के अंधेरे में पेड़ों की कटाई होती रही और देखते ही देखते बाग का बड़ा हिस्सा उजाड़ दिया गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और पेड़ काटने में इस्तेमाल मशीनें जब्त कर ली गईं। कार्रवाई के बाद अब उद्यान और वन विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक साथ तीन दर्जन से अधिक हरे फलदार पेड़ काटे जा रहे थे, तब संबंधित उद्यान विभाग को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्य जिला उद्यान अधिकारी डीके तिवारी ने विकासनगर के उद्यान प्रभारी को तलब किया है। उनका कहना है कि अवैध पेड़ पातन करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल आरी चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बाग स्वामी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं विकासनगर के उद्यान प्रभारी मोहम्मद हुसैन खान का कहना है कि वह बुधवार को तहसीलदार से मुलाकात कर मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखेंगे।
कार्रवाई हुई, लेकिन पेड़ तो वापस नहीं आएंगे
घटना के बाद पुलिस कार्रवाई, अधिकारियों का तलब होना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के बयान सामने आ रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि तीन दर्जन से ज्यादा हरे पेड़ अब जमीन पर पड़े हैं और वर्षों में तैयार हुआ बाग कुछ घंटों में उजड़ गया।
यही वजह है कि स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि विभागों की कार्रवाई घटना के बाद ही क्यों दिखाई देती है? यदि बाग में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो रही थी तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां थी?
कटे पेड़ों की लकड़ी कहां गई?
मामले को और गंभीर बनाने वाला सवाल यह है कि मौके से काटी गई लकड़ी के गायब होने की बात सामने आ रही है। यदि लकड़ी मौके से हटाई गई तो किसकी अनुमति से और किस प्रक्रिया के तहत?
यहीं से वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ी को मौके से हटाया गया। ऐसे में जांच का एक अहम बिंदु यह होना चाहिए कि काटे गए पेड़ों की लकड़ी कहां गई और उसे वहां से हटाने की अनुमति किसने दी।
पुलिस ने मौके से लोगों और पेड़ काटने में इस्तेमाल मशीनों को पकड़ लिया, लेकिन यदि लकड़ी वास्तव में गायब है तो उसकी बरामदगी और पूरे घटनाक्रम की जांच भी जरूरी है।
क्या बाग उजाड़ने के पीछे जमीन का खेल?
हरबर्टपुर और आसपास के क्षेत्रों में कृषि भूमि और बागों के बदलते स्वरूप को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में हरे-भरे फलदार पेड़ों का रातोंरात कट जाना महज पेड़ कटने की घटना तक सीमित नहीं माना जा सकता।
जांच का यह पहलू भी सामने आना चाहिए कि क्या बाग को समाप्त करने के बाद जमीन के किसी अन्य उपयोग की तैयारी थी? यदि ऐसा कोई उद्देश्य था तो संबंधित भू-अभिलेख, भूमि उपयोग, पेड़ों की कटाई की अनुमति और लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी आवश्यक होगी।
हालांकि इन आशंकाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन जिस तरह बड़ी संख्या में हरे पेड़ एक साथ काटे गए, उससे कई सवाल स्वतः खड़े हो गए हैं।
अब जांच सिर्फ पेड़ काटने वालों तक सीमित न रहे
मामले में पुलिस की ओर से प्रारंभिक कार्रवाई हो चुकी है। उद्यान विभाग ने भी जांच और कार्रवाई की बात कही है। अब जरूरत इस बात की है कि जांच सिर्फ आरी चलाने वाले लोगों तक सीमित न रहे।
जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पेड़ किसके आदेश पर काटे गए, बाग का स्वामी कौन है, पेड़ काटने की अनुमति थी या नहीं, काटी गई लकड़ी कहां ले जाई गई, उसे हटाने की अनुमति किसने दी और संबंधित विभागों को इतनी बड़ी कटाई की जानकारी क्यों नहीं हुई।
क्योंकि सवाल सिर्फ तीन दर्जन पेड़ों के कटने का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जिसकी निगरानी में एक पूरा हरा-भरा बाग रातोंरात उजड़ गया।
अब देखना होगा कि दर्ज मुकदमा केवल कागजों तक सीमित रहता है या जांच वास्तव में बाग स्वामी, पेड़ कटवाने वालों, आरी चलाने वालों और लकड़ी को मौके से हटाने वालों तक पहुंचती है।
पेड़ कट चुके हैं।
बाग उजड़ चुका है।
अब कम से कम जांच ऐसी होनी चाहिए कि अगली रात किसी दूसरे बाग में आरी चलने से पहले जिम्मेदार विभाग जाग जाएं।


