- शिकायतकर्ता ने लगाया काम नहीं होने और झूठी रिपोर्ट लगाने का आरोप, विभाग ने योजना को बताया सुचारू
मोरी/उत्तरकाशी। 24 सितंबर। रिपोर्ट- नीरज उत्तराखंडी
ग्राम पंचायत कुकरेड़ा के खूनीगाड़ में निर्मित सिंचाई योजना को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत के निस्तारण के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। शिकायतकर्ता ने विभागीय जांच और निस्तारण रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया है कि मौके पर अपेक्षित कार्य नहीं हुआ है, जबकि पोर्टल पर योजना को सुचारू और पूर्ण बताया जा रहा है।
सीएम हेल्पलाइन के रिकॉर्ड के अनुसार शिकायत संख्या CMHL-082026-7-1097662, दिनांक 8 अगस्त 2026, लघु सिंचाई विभाग से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023-24 की योजना में गूल में अपेक्षित कार्य नहीं हुआ और केवल मेन हेड बनाए जाने की बात थी। शिकायत में करीब 400 मीटर और 900 मीटर कार्य के लिए क्रमश: 4.80 लाख और 9.54 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत/व्यय किए जाने का उल्लेख करते हुए योजना की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले में विभागीय अधिकारियों द्वारा कई बार स्थलीय निरीक्षण किए जाने के बावजूद समस्या का वास्तविक समाधान नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पोर्टल पर ऐसी रिपोर्ट लगाई जा रही है, जिससे उच्चाधिकारियों को वास्तविक स्थिति से गुमराह किया जा रहा है।
विभाग की रिपोर्ट में योजना को बताया गया सही
सीएम हेल्पलाइन रिकॉर्ड में विभागीय अधिकारी मदन मोहन शर्मा की ओर से दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि 9 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत कुकरेड़ा के खूनीगाड़ में निर्मित सिंचाई योजना का स्थलीय निरीक्षण किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार मौके पर गूल में पानी चल रहा था और योजना पूर्ण रूप से सही पाई गई। जांच आख्या और फोटो भी पोर्टल पर संलग्न किए जाने की बात कही गई है।
बाद में 2 सितंबर 2026 को भी इसी आधार पर योजना को सुचारू बताया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लगातार असंतोष जताए जाने पर शिकायत को पुनः असाइन किया गया।
शिकायतकर्ता ने मांगी दूसरे अधिकारी से जांच
9 सितंबर 2026 को दर्ज अधिकारी की टिप्पणी में उल्लेख है कि शिकायतकर्ता से वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि योजना स्थल पर कार्य नहीं किया गया है। अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई खंड उत्तरकाशी को स्थलीय निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे और 2 सितंबर को निरीक्षण भी किया गया। अधिकारी की रिपोर्ट में योजना को सुचारू बताया गया तथा फोटो पोर्टल पर अपलोड किए जाने की जानकारी दी गई।
हालांकि, शिकायतकर्ता ने किसी अन्य अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि इससे पूर्व अधीक्षण अभियंता, लघु सिंचाई वृत्त टिहरी द्वारा भी स्थल का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके बाद प्रकरण को किसी अन्य अधिकारी से जांच कराने के लिए उच्च स्तर पर भेजा गया।
असली सवाल—मौके की हकीकत कौन तय करेगा?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि विभागीय निरीक्षण में योजना पूरी तरह सही और सुचारू पाई गई है, तो शिकायतकर्ता लगातार असंतुष्ट क्यों है? वहीं यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं तो केवल विभागीय अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर शिकायत का निस्तारण क्यों किया जाए?
ऐसे में निष्पक्षता के लिए किसी स्वतंत्र अथवा दूसरे विभागीय अधिकारी की टीम से पुनः स्थलीय जांच, स्वीकृत लागत, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण, कार्य की लंबाई और मौके की वर्तमान स्थिति का मिलान कराया जाना आवश्यक होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कागजों में दर्ज कार्य और जमीन पर मौजूद कार्य में कोई अंतर है या नहीं।


