स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- उत्तराखंड उच्च न्यायालय में किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिकाओं में हुए चुनाव की मतगणना नहीं करने को लेकर राज्य चुनाव आयोग और सरकार के आदेश को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई हुई।
खंडपीठ ने राज्य सरकार व राज्य चुनाव आयोग के मतगणना न करने के आदेश पर लगी रोक को हटाते हुए कहा कि जब चुनाव हो गया तो मतगणना पर क्यों रोक लगी है ? इसलिए मतगणना शीघ्र प्रारम्भ की जाय।
मामले के अनुसार, किच्छा निवासी अलीना मलिक ने बीते दिनों हुए चुनाव की मतगणना करने की मांग की थी। पिछली सुनवाई में, एकलपीठ को राज्य चुनाव आयोग ने जानकारी दी कि दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान कराया जायेगा। आयोग ने अधिसूचना जारी कर चुनांव के बाद होने वाली मतगणना को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखने का आदेश दिया।
किच्छा निवासी नईमुल हुसैन सहित कई अन्य ने जनहित याचिका सहित अन्य याचिकाएं दायर कर कहा कि सरकार ने प्रदेश की 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की अधिसूचना जारी कर आम जनता से आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन इसमें किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया था।
याचिका में कहा गया कि सरकार किच्छा में नगर पालिका चुनाव टालना चाहती है। याचिका में यह भी कहा गया कि आरक्षण आवंटन नियमावली के तहत अध्यक्ष पदों की कुल संख्या के आधार पर रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए, जबकि सरकार ने 43 पालिकाध्यक्ष पदों के आधार पर ही रोस्टर तय किया।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, पूर्व में सरकार ने किच्छा नगर पालिका के कुछ वार्डों और गांवों को पालिका में शामिल किया था, जिसपर न्यायालय ने रोक लगा दी थी। बाद में सरकार ने इन क्षेत्रों को दोबारा नगर पालिका में शामिल किया। इसके बाद चुनाव को लेकर विवाद सामने आया।
न्यायालय के पूर्व आदेश के बाद किच्छा नगर पालिकाध्यक्ष का आरक्षण भी तय कर दिया गया, लेकिन चुनाव नहीं कराया गया। याचिका में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है। यही नहीं, सरकार नव गठित सरौली कलां नगर पालिका का चुनाव भी नहीं कराया। उसमें भी चुनाव कराने की मांग की गयी है।


