उत्तरकाशी। 5 अक्तूबर 2026-नीरज उत्तराखंडी
- “दावा बड़ा, अब जांच की बारी—कागज बोलेगा या जमीन?”
शिकायत में करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन से लेकर सड़क, आवास, मनरेगा और सिंचाई योजनाओं तक सवाल उठाए गए हैं। अब प्रशासन के सामने चुनौती आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक वित्तीय नुकसान और जिम्मेदारी तय करने की है।
जिले के विकास खंड मोरी की ग्राम पंचायत कुकरेड़ा में पूर्व ग्राम प्रधान चतर सिंह के कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायत ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला अधिकारी उत्तरकाशी को प्रेषित शिकायती पत्र पर मोहन लाल, ज्ञान दास, जनक सिंह, नरेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह, गुमान सहित अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। ग्रामीणों ने वर्ष 2010 से 2018 तक ग्राम पंचायत में संचालित विभिन्न योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर विवाह अनुदान की राशि निकाली गई, सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति दर्शाकर आवास योजना का लाभ दिलाया गया तथा ग्राम प्रधान के परिवार और करीबियों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया।
सबसे गंभीर आरोप ‘मेरा गांव मेरी सड़क’ योजना को लेकर लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार मोटर पुल तलवाड़ से खाटल तक प्रस्तावित करीब एक किलोमीटर सड़क में मौके पर लगभग आधा किलोमीटर कटिंग ही हुई, जबकि निर्माण कार्य के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान दर्शाया गया। सीमेंट खरीद, ढुलान, सामग्री आपूर्ति और कथित रूप से परिवार से जुड़े लोगों को भुगतान किए जाने की भी जांच की मांग की गई है।
शिकायत में इस योजना में करीब 25 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया है। साथ ही करीब 10 लाख रुपये के सीमेंट भुगतान को संदिग्ध बताते हुए संबंधित बिल-वाउचर, आपूर्ति स्रोत और मौके पर इस्तेमाल हुई सामग्री का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
मनरेगा के मस्टर रोल भी जांच के घेरे में
शिकायतकर्ताओं ने मनरेगा में बिना काम कराए परिजनों और करीबियों के नाम पर मजदूरी भुगतान निकालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संबंधित अवधि के मस्टर रोल, जॉब कार्ड, बैंक भुगतान, माप पुस्तिकाएं और कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।
खूनीगाड़ सिंचाई नहर पर भी सवाल
खूनीगाड़ सिंचाई नहर की मरम्मत के नाम पर करीब 15 लाख रुपये के कथित गबन का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत की गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच की मांग
शिकायत में पूर्व ग्राम प्रधान और उनसे जुड़े कई लोगों के बैंक खातों में वर्ष 2010 से 2018 के बीच करोड़ों रुपये के कथित संदिग्ध लेनदेन का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने सहकारी बैंक मोरी तथा एसबीआई की मोरी, त्यूणी और आराकोट शाखाओं में संबंधित खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है।
हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों और कथित लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित सरकारी अभिलेखों, बैंक रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगी।
जांच के घेरे में कौन-कौन से विभाग?
समाज कल्याण विभाग — विवाह अनुदान एवं पात्रता संबंधी अभिलेख
ग्राम्य विकास विभाग — मनरेगा एवं ग्राम पंचायत की योजनाएं
ग्रामीण निर्माण/संबंधित विभाग — ‘मेरा गांव मेरी सड़क’ के निर्माण और भुगतान
सिंचाई विभाग — खूनीगाड़ नहर मरम्मत
जल संस्थान/जल निगम/लघु सिंचाई — संबंधित योजनाओं के भुगतान व कार्य
बैंक शाखाएं — कथित संदिग्ध लेनदेन की जांच
शिकायतकर्ताओं की प्रमुख मांगें
– SIT अथवा विजिलेंस स्तर से निष्पक्ष जांच
– वर्ष 2010 से 2018 तक सभी योजनाओं का विशेष ऑडिट
– कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन
– मस्टर रोल और बैंक भुगतान का मिलान
– सामग्री खरीद एवं बिल-वाउचर की जांच
– संबंधित बैंक खातों के लेनदेन का फॉरेंसिक ऑडिट
– सरकारी धन की पुष्टि होने पर नियमानुसार वसूली
– दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई
अब निगाह प्रशासनिक जांच पर है। शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बल्कि अभिलेखों, बैंक लेनदेन, मस्टर रोल, तकनीकी माप और मौके के सत्यापन से होगा।
यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर वसूली और कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।


