- नंद लाल भारती ने सीएम धामी को सौंपा प्रस्ताव, वर्ष 2016 से लागू कथित प्रतिबंध पर उठाए सवाल; बोले—बच्चों के शैक्षिक अधिकार पर गंभीरता से हो पुनर्विचार
देहरादून, 8 अक्टूबर 2026। नीरज उत्तराखंडी
जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर के आवासीय एवं आश्रम पद्धति विद्यालयों में अनुसूचित जाति के बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पाने का मुद्दा अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता नंद लाल भारती ने मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में इस संबंध में प्रस्ताव सौंपते हुए वर्ष 2016 से प्रभावी बताए जा रहे प्रवेश प्रतिबंध पर पुनर्विचार की मांग की है।
भारती का कहना है कि जौनसार-बावर क्षेत्र में आश्रम टाइप स्कूल (ATS), एकलव्य जैसे आवासीय विद्यालयों में अनुसूचित जाति समुदाय के बच्चों के प्रवेश का रास्ता बंद होने से गरीब एवं वंचित परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा के अवसर से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
‘कौन जिम्मेदार और कौन करेगा पैरवी?’
मुख्यमंत्री को दिए प्रस्ताव में नंद लाल भारती ने सवाल उठाया कि यदि वर्ष 2016 से अनुसूचित जाति के बच्चों के प्रवेश पर प्रतिबंध प्रभावी है तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है और इस विषय में शासन के समक्ष पैरवी कौन करेगा? उन्होंने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
भारती ने कहा कि विधानसभा में बैठने वाले और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले दायित्वधारी इस महत्वपूर्ण सामाजिक एवं शैक्षिक विषय पर मौन हैं। उनका आग्रह है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर बच्चों के भविष्य से जुड़े इस विषय पर सरकार ठोस निर्णय ले।
सरकारी व्यवस्था में एससी विद्यार्थियों के लिए आवासीय शिक्षा का प्रावधान
उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों की स्थापना अनुसूचित जाति के निर्धन विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। इन विद्यालयों में आवास, भोजन, यूनिफॉर्म और पुस्तकों जैसी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। विभाग के अनुसार वर्तमान में पांच राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं।
वहीं, उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की ओर से वर्ष 2026 के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की प्रवेश परीक्षा संबंधी विज्ञप्ति एवं दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
नंद लाल भारती के प्रस्ताव में उठाया गया सवाल केवल किसी एक विद्यालय में प्रवेश का विषय नहीं है, बल्कि समान शैक्षिक अवसर, सामाजिक न्याय और वंचित वर्ग के बच्चों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। जौनसार-बावर जैसे भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्र में आवासीय विद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
ऐसे में यदि किसी प्रशासनिक या नीतिगत व्यवस्था के कारण किसी वर्ग के बच्चों को इन संस्थानों में प्रवेश नहीं मिल रहा है तो उस व्यवस्था की वर्तमान परिस्थितियों में प्रासंगिकता, वैधानिक आधार और सामाजिक प्रभाव की समीक्षा किए जाने की मांग उठना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा
भारती ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मामले का परीक्षण कर वर्ष 2016 से लागू बताई जा रही प्रवेश व्यवस्था की समीक्षा की जाए और अनुसूचित जाति के बच्चों के हित में आवश्यक निर्णय लिया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस प्रस्ताव का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाएंगे और बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस विषय पर समाधान की दिशा में पहल करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मामले में सकारात्मक पहल करती है तो इससे अनुसूचित जाति समुदाय के बच्चों को आवासीय शिक्षा के अवसर उपलब्ध होने के साथ-साथ क्षेत्र में सामाजिक समरसता और समान अवसर की भावना भी मजबूत होगी।






