देहरादून: उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की तैयारियों को परखने और आमजन को जागरूक करने के लिए 9 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11 बजे राज्यभर में भूकंप का सायरन बजाया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह किसी वास्तविक भूकंप की चेतावनी नहीं होगी, बल्कि Earthquake Early Warning System के परीक्षण के लिए सायरन बजाया जाएगा।
सायरन बजने के साथ भूदेव मोबाइल ऐप इस्तेमाल करने वाले लोगों के मोबाइल पर भी परीक्षण चेतावनी संदेश, वाइब्रेशन और बीप-बीप की आवाज आ सकती है।
169 सेंसर और 112 सायरन का होगा परीक्षण
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के अनुसार, उत्तराखंड में वर्तमान में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। 9 अक्टूबर को सायरन बजाकर इनकी कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जाएगा।
यदि परीक्षण के दौरान किसी स्थान पर सायरन या सिस्टम में तकनीकी खामी सामने आती है तो उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा, ताकि वास्तविक भूकंप की स्थिति में चेतावनी प्रणाली प्रभावी तरीके से काम कर सके।
भूकंप का सायरन सुनकर घबराएं नहीं
अधिकारियों का कहना है कि इस परीक्षण का एक उद्देश्य लोगों को सायरन की आवाज से परिचित कराना भी है। इससे वास्तविक भूकंप के दौरान लोग सायरन को पहचान सकेंगे और घबराने के बजाय आवश्यक सावधानी बरत सकेंगे।
यूएसडीएमए ने आमजन से अपील की है कि 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे सायरन सुनाई देने पर इसे वास्तविक भूकंप की चेतावनी न समझें।यह पहले से निर्धारित सिस्टम टेस्ट है।
भूदेव ऐप पर भी मिलेगा टेस्ट अलर्ट
परीक्षण के दौरान भूदेव मोबाइल ऐप पर भी टेस्ट अलर्ट भेजा जाएगा। मोबाइल पर चेतावनी संदेश के साथ वाइब्रेशन और बीप-बीप की आवाज आ सकती है।
आमजन से अपील की गई है कि:
- भूदेव ऐप का अपडेटेड वर्जन मोबाइल में रखें।
- ऐप को लोकेशन की अनुमति हमेशा के लिए दें।
- भूकंप चेतावनी वाले सायरन की आवाज को पहचानें।
- परिवार के सदस्यों, बच्चों और बुजुर्गों को भी इसकी जानकारी दें।
- भूकंप के दौरान सुरक्षित व्यवहार और आपदा प्रबंधन की जानकारी हासिल करें।
- मॉक ड्रिल होने पर उसमें सक्रिय रूप से भाग लें।
सेंसर और सायरन की संख्या बढ़ाने की तैयारी
सचिव आपदा प्रबंधन के मुताबिक उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सेंसर और सायरन की संख्या को दोगुना करने की योजना है।
इसके तहत करीब 5 से 10 किलोमीटर के अंतराल पर सेंसर और सायरन स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से अतिरिक्त सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी प्रक्रिया में है।
हर महीने 9 तारीख को होगा सायरन टेस्ट
यूएसडीएमए की अपील के मुताबिक हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन बजाकर भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली का नियमित परीक्षण और जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नियमित सायरन टेस्ट के दौरान घबराने के बजाय इसे भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की जांच के रूप में समझें|






