- दो सप्ताह में बनेगी तीन सदस्यीय समिति, दवा कंपनियों की मार्केटिंग पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी
देहरादून/नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026।नीरज उत्तराखंडी
दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को महंगे उपहार, नकद लाभ, विदेश यात्राएं और अन्य सुविधाएं देकर अपनी दवाएं लिखने के लिए कथित तौर पर प्रभावित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
न्यायालय ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति फार्मास्युटिकल कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों की समीक्षा कर अनैतिक प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कानूनी और नियामकीय व्यवस्था बनाने संबंधी सिफारिशें देगी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 8 अक्टूबर को फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में यह निर्देश दिया।
याचिका में दवा कंपनियों और चिकित्सा पेशेवरों के बीच कथित अनुचित लेन-देन पर रोक लगाने के लिए प्रभावी तथा कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था की मांग की गई थी।
मरीजों की जेब और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ दवा कंपनियां डॉक्टरों को उपहार, आतिथ्य, आर्थिक लाभ और विदेश यात्राओं जैसी सुविधाएं देकर महंगी ब्रांडेड दवाएं अथवा अनावश्यक दवाओं के संयोजन लिखने के लिए प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी प्रथाओं से मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ बढ़ने और दवाओं के अनुचित इस्तेमाल का खतरा पैदा हो सकता है।
न्यायालय ने माना कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नैतिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा नियामकीय व्यवस्था की पर्याप्तता की समीक्षा आवश्यक है।
डॉक्टरों पर नियम, कंपनियों के लिए व्यवस्था पर सवाल
केंद्र सरकार ने न्यायालय को बताया कि डॉक्टरों के पेशेवर आचरण को नियंत्रित करने के लिए नियम मौजूद हैं। वहीं, दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को कथित अनुचित लाभ देने के मामलों में कंपनियों के आचरण को सीधे नियंत्रित करने वाली स्पष्ट, प्रभावी और बाध्यकारी वैधानिक व्यवस्था की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए।
वर्तमान में लागू यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP), 2024 दवा कंपनियों की प्रचार गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रमुख ढांचा है। हालांकि, इसे वैधानिक रूप से बाध्यकारी बनाने और इसके उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
समिति की सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, समिति याचिकाकर्ताओं, अन्य संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों के सुझाव सुनेगी। उसे अपनी पहली बैठक से दो महीने के भीतर सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी हैं। इसके बाद सरकार को उचित निर्णय लेकर न्यायालय में अनुपालन संबंधी हलफनामा दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।






