नई दिल्ली।गिरीश चंदोला
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की सियासत में हलचल तेज है। अंकिता के माता-पिता को लेकर भाजपा सांसद अनिल बलूनी दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय पहुंचे।
यहां उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर मामले की जांच में तेजी लाने की बात कही। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अंकिता प्रकरण को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति को झटका लगा है?
दो दिन पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता के समर्थन में पहुंचे थे। इस दौरान सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद भाजपा की ओर से सक्रियता बढ़ी और सांसद अनिल बलूनी अंकिता के माता-पिता के साथ सीबीआई मुख्यालय पहुंच गए।
बलूनी की इस पहल को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अंकिता का परिवार पौड़ी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां से अनिल बलूनी सांसद हैं। ऐसे में परिजनों के साथ सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात को भाजपा की ओर से मामले में सक्रियता दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी के प्रस्तावित धरने पर नजर
बलूनी के साथ सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात के बाद अब सबकी नजर अंकिता के माता-पिता के अगले कदम पर है। क्या परिजन प्रस्तावित धरने में शामिल होंगे और क्या राहुल गांधी भी उनके साथ धरने पर बैठेंगे? इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
यदि धरने के कार्यक्रम में बदलाव होता है, तो भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, इसे कांग्रेस के हाथ से मुद्दा निकलने के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी।
न्याय की मांग के बीच सियासी घमासान
अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रहा है। कांग्रेस इस मामले को लेकर भाजपा पर सवाल उठाती रही है। वहीं, अब भाजपा सांसद की पहल के बाद मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सीबीआई अधिकारियों ने परिजनों को निष्पक्ष जांच और न्यायसंगत कार्रवाई का भरोसा दिया है। फिलहाल, परिवार की ओर से प्रस्तावित धरने और आगे की रणनीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने आने का इंतजार है।
ऐसे में यह देखना अहम होगा कि बलूनी की पहल का राजनीतिक असर कितना पड़ता है और अंकिता के माता-पिता न्याय की मांग को लेकर आगे क्या कदम उठाते हैं।






