देहरादून, 28 अक्टूबर। नीरज उत्तराखंडी
निराश्रित एवं पालतू पशुओं के प्रबंधन में लापरवाही को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने पशुओं के पंजीकरण, डेयरी सर्वे, गौशालाओं की निगरानी, पशु चिकित्सा सेवाओं और हेल्पलाइन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं नगर निकायों को पशुओं के पंजीकरण और मॉनिटरिंग के लिए समर्पित पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। पोर्टल पर पशुओं की संख्या, पंजीकरण की स्थिति और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज किए जाएंगे। इसके साथ ही नगर निगम और निकाय क्षेत्रों में संचालित डेयरियों का विस्तृत सर्वे कर वहां रखे पशुओं और उनके पंजीकरण का रिकॉर्ड तैयार करने को कहा गया।
1962 पर फोन किया, नहीं मिला अपेक्षित रिस्पॉन्स
पशु हेल्पलाइन 1962 पर शिकायतों का उचित रिस्पॉन्स नहीं मिलने और पशु एंबुलेंस उपलब्ध न होने की शिकायतों को डीएम ने गंभीरता से लिया। व्यवस्था की हकीकत परखने के लिए उन्होंने स्वयं हेल्पलाइन पर फोन किया। अपेक्षित रिस्पॉन्स नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को संबंधित कार्मिकों की जवाबदेही तय करने और वेतन रोकने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पशुओं के उपचार और रेस्क्यू से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए तथा पशु एंबुलेंस की उपलब्धता और संचालन की नियमित निगरानी की जाए।
प्रवेश-निकास मार्गों पर कैमरों से होगी निगरानी
डीएम ने नगर निगम एवं नगर निकायों के प्रमुख प्रवेश और निकासी मार्गों पर कैमरे लगाने के निर्देश दिए, ताकि पशुओं के आवागमन पर नजर रखी जा सके। निराश्रित गौवंशीय पशुओं को पकड़ने और उनके समुचित प्रबंधन के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा गया।
गौशालाओं में चारा-पानी, साफ-सफाई, रखरखाव और चिकित्सकीय उपचार निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने तथा नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए।
श्वानों के पंजीकरण और रेस्क्यू पर जोर
पालतू एवं निराश्रित श्वानों के प्रबंधन को लेकर भी डीएम ने पंजीकरण व्यवस्था मजबूत करने को कहा। श्वान के काटने की शिकायतों पर रैपिड रेस्क्यू टीम के माध्यम से त्वरित कार्रवाई और संबंधित श्वानों को नियमानुसार एबीसी सेंटर में 10 दिन की निगरानी एवं आइसोलेशन में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वहीं, बंदरों के आतंक से प्रभावित आबादी वाले क्षेत्रों में वन विभाग के साथ समन्वय कर निर्धारित नियमों के तहत रेस्क्यू अभियान चलाने को कहा गया।
डीएम ने स्पष्ट किया कि पशु प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं में विभागीय समन्वय, नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि पशु कल्याण के साथ आमजन की सुरक्षा और शिकायतों का प्रभावी समाधान भी हो सके।






