महाराज का नैनीताल से हाईकोर्ट हटाने वाला बयान! भाने लगा है

कृष्णा बिष्ट/नैनीताल

कुछ दिन पहले पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने सरोवरनगरी नैनीताल से हाईकोर्ट को शिफ्ट करने की बात क्या कही, वे प्रदेशभर के अधिवक्ताओं के निशाने पर आ गये थे। सतपाल महाराज का तर्क था कि नैनीताल की पहचान पर्यटन नगरी के रूप में है ऐसे में हाई कोर्ट के भी यहीं होने से नैनीताल पर अतिरिक्त जन दबाव पड़ रहा है। यह अतिरिक्त जनदबाव पर्यटन के लिए नैनीताल आनेवालों पर नकारात्मक असर डाल रहा है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज नौकुचियाताल में एक पर्यटन आवास का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस मौके पर पर्यटन मंत्री ने कहा था कि नैनीताल में बढ़ते ट्रैफिक के चलते हाई कोर्ट को कहीं और शिफ्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि वे इस मसले पर हाई कोर्ट के आलाधिकारियों से आग्रह करेंगे।

पर्यटन मंत्री ने कहा था कि हाई कोर्ट में आने वाले अधिकतर मामले मैदानी इलाकों के होते है। ऐसे में हाई कोर्ट को उधमसिंह नगर या हरिद्वार में शिफ्ट किया जाना चाहिए।

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हालांकि तब महाराज के इस बयान के साथ कोई भी खड़ा नहीं हुआ, लेकिन अब जबकि नैनीताल की ट्रैफिक व्यवस्था चरमराने पर कुछ दिन पूर्व नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा जिले के डीएम, एसएसपी व अन्य संबंधित विभागों को नोटिस देने से अचानक हरकत में आई प्रशासनिक मशीनरी के कारण नैनीताल का होटल एसोसिएशन, व्यापारी व टैक्सी यूनियन तिलमिला उठे हैं। यही नहीं अब सभी नैनीताल से हाईकोर्ट के अन्यत्र स्थानांतरण करने को मुखर दिखाई दे रहे हैं।और तो और हल्द्वानी व्यापार मंडल ने भी हाई कोर्ट नैनीताल से अन्यत्र अंतरित करने की मांग कर डाली है।
प्रशासन की सख्ती के कारण धीरे-धीरे सभी संगठन एकजुट होने लगे और सरकार को दबाव में लेने के लिए होटल एसोसिएशन ने 17 जून से अनिश्चितकाल की हड़ताल की धमकी तक दे डाली, लेकिन टूरिस्ट के पीक सीजन में यह कदम उठाने की हिम्मत न तो संगठन जुटा पाया और न ही प्रशासन। कई दौर की बैठकों के बाद एसोसिएशन ने प्रशासन की कुछ शर्तों के साथ समझौते बाद हड़ताल को टाल दिया, लेकिन इस घटनाक्रम ने सभी संगठनों को एक साथ जरूर एकजुट कर दिया है।
कल तक जो संगठन सतपाल महाराज के नैनीताल से हाईकोर्ट को शिफ्ट करने के बयान के साथ खड़े होने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे, आज जब उन्हीं पर बन आई तो वे सभी तिलमिला उठे। आलम यह है कि अब सभी लोग खुलकर नैनीताल से हाईकोर्ट को शिफ्ट करने की बात करने लगे हैं। यही नहीं नैनीताल से हाईकोर्ट व प्रशासनिक दफ्तरों को भी शिफ्ट करने के लिए प्रांतीय उद्योग व्यापर प्रतिनिधिमंडल प्रदेशभर के व्यापारियों का समर्थन जुटाने की कोशिश में लगा हुआ है। मांग को लेकर व्यापारी 23 जून से आंदोलन की घोषणा करने की तैयारी कर रहे हैं।

नैनीताल में इस टकराव की स्थिति के लिए कहीं न कहीं खुद होटल व अन्य व्यवसायी ही जिम्मेदार हैं। नैनीताल में हर वर्ष अनियांत्रित होती भीड़ व सड़कों पर बढ़ते वाहनों के दबाव ने नैनीताल की वास्तविक सौंदर्य को ही नहीं, बल्कि नैनीताल की आत्मा को भी खत्म करने का काम किया है। नैनीताल के अधिकतर होटलों के पास या तो अपनी पार्किंग नहीं है और यदि किसी के पास है भी तो होटलों के कमरों के अनुसार वह भी पर्याप्त नहीं है।
यही हाल मॉल रोड के होटलों का भी है। इसके अलावा जिसको जहां मौका मिला, उसने वहां बिना पार्किंग के होटल या लॉज बना लिया है। अब इन होटलों में जो भी पर्यटक आता है, उसे अपने वाहनों को पार्क करने की जगह नहीं मिल पाती। फिर उनको अपने वाहन सड़कों पर पार्क करने पड़ते हैं, जिस कारण शहर में जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इन सब बातों का पता नहीं है, बल्कि प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंद कर निष्क्रिय बैठा है। इस पर अगर कभी अधिक चर्चा भी हुई तो प्रशासन कुछ समय के लिए कार्यवाही का बहाना कर मामला शांत होने के इंतजार में रहता है। अगर पूरे सालभर जिला प्रशासन ईमानदारी से काम करे तो इस प्रकार की विकट स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। प्रशासन अगर बिना पार्किंग व कम पार्किंग के होटलों, जहां-तहां खुले अवैध होटलों व लॉजो पर शिकंजा कसे तो नैनीताल को बचाया जाना इतना कठिन भी नहीं है।
जब नैनीताल की इस ही दुर्दशा पर कुछ दिन पूर्व हाईकोर्ट ने डीएम, एसएसपी व अन्य सबंधित विभागों को नोटिस दिया तो तब जाकर प्रशासनिक अमले की नींद टूटी और प्रशासन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए बिना पूर्व सूचना के नैनीताल में नाकेबंदी कर दी। नैनीताल आ रहे पर्यटकों को नैनीताल से लगभग 10 से 15 किलोमीटर पहले रोक दिया गया। इस समस्या का समाधान तीन दिनों के विरोध के बाद सुलझाया जा सका।
बहरहाल, नैनीताल में हुई जाम की विकट स्थिति और इस पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप करने के बाद व्यापारियों का हाईकोर्ट को यहां से शिफ्ट करने के लिए लामबंद होने से महाराज के बयान को बल जरूर मिला है। जाहिर है कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के चेहरे पर इस घटनाक्रम के बाद मुस्कान जरूर लौट आई होगी।

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