एक्सक्लूसिव : दागी अफसरों पर खामोशी का राज !

मिश्रा पर इतनी मेहरबानी क्यों मुख्यमंत्री जी…..

दागी अफसर को हरिद्वार का डीईओ बनाने के पीछे सरकार की क्या मजबूरी थी..?

दान दिए हुए सेनीटाइजर भी जिसने बेच दिए उस पर इतना प्रेम क्यों..?

मुख्यमंत्री जी, आबकारी मंत्री भी आप ही हैं, कुछ कीजिये सरकार

*आबकारी अधिकारी प्रभाशंकर मिश्रा*

आरोप नम्बर :- 1

मिश्रा पर कोरोना लॉक डाउन के दौरान सेनीटाइजर इकट्ठा कर के खुर्द-बुर्द करने के आरोप हैं।

प्रभाशंकर मिश्रा उपायुक्त हैं। आबकारी मुख्यालय में तैनात हैं। उनको हरिद्वार का प्रभार वहाँ के डीईओ ओमकार सिंह के सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने और अभी तक अस्पताल में गंभीर हालत में ही होने के कारण दिया गया है। इस ज़िम्मेदारी के दौरान ही उन पर सेनीटाइजर खुर्द-बुर्द करने के आरोप लगे हैं। इस मामले को कई प्रमुख अखबारों ने सुर्खियां दी हैं। फिर भी सरकार खामोश बैठी थी।

आरोप नम्बर :- 2

3 साल पहले जब वह पौड़ी में इसी ओहदे की विधिवत ज़िम्मेदारी को संभाल रहे थे तो दुकानों के अधिभार में करोड़ों की गड़बड़ी को ले कर भी नोटिस का सामना कर रहे हैं।

मिश्रा 3 साल पहले पौड़ी में डीईओ रह चुके हैं। तब भी उन्होंने कई शराब ठेकेदारों को अधिभार मामले में राहत दे के सरकारी राजस्व को नुक्सान पहुंचाया, ऐसे आरोप उन पर है। सूत्रों के मुताबिक उनकी तैनाती के दौरान पौड़ी जिले के 3 दुकानों के मालिकों ने अधिभार रोक लिए और सरकार को करोड़ों का नुक्सान पहुंचा। इस मामले के भी उछलने से अब मुख्यालय स्तर पर आरोपों का परीक्षण शुरू हो गया है।

पौड़ी के जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने  कहा, `दुकानों के अधिभार संबंधी मामलों की शिकायत उनके पास आई है। उन्होंने इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद इस संबंध में संभावित कार्रवाई के बारे में कुछ कहा जा सकता है’।

आरोप नम्बर :- 3

आला अफसरों के आदेश को भी गोल-गोल घुमाने के माहिर खिलाड़ी

आबकारी विभाग को करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि मिश्रा आला अधिकारियों के आदेश को भी गोल गोल घुमाने में माहिर हैं। एक नहीं कई परिवार ऐसे हैं जो इस ओर इशारा करते हैं।

मिश्रा खुद पहुँच गए साइबर सेल

अब मिश्रा साइबर सेल में खुद ही शिकायत करने गए हैं कि उनके खिलाफ आधारहीन आरोप सेनीटाइजर मामले में लगाए जा रहे हैं। इससे ये साबित हो गया कि वही वह अधिकारी है, जिन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका नाम-ओहदा-जिले का नाम अभी तक किसी अखबार या पोर्टल ने नहीं लिखा था। उन्होंने आधिकारिक शिकायत कर विभागीय कार्रवाई का रास्ता खुद ही खोल दिया।

प्रमुख सचिव आबकारी ने कहा जांच तो होगी

प्रमुख सचिव (आबकारी) आनंदबर्द्धन ने कहा कि हरिद्वार के प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी प्रभाशंकर मिश्रा पर लगे आरोपों की जांच कराई जाएगी। प्रमुख सचिव (आबकारी) आनंदबर्द्धन से मिश्रा पर लगे आरोपों के बारे में कार्रवाई के बाबत पूछने पर उन्होंने कहा कि शासन के संज्ञान में शिकायत और आरोप तो थे, लेकिन कोई पुख्ता आधार जांच शुरू करने के लिए नहीं था। वह आरोपों के खिलाफ खुद ही साइबर सेल में गए हैं, तो शासन इन प्रकरणों की जांच कराएगा। जांच के लिए उनका खुद ही शिकायत करना आधार हो जाएगा।

कुछ कीजिये CM साहब

महकमे और शासन में है कि आखिर कई डीईओ के खाली रहते दागी और एक ओहदा ऊपर के अफसर को हरिद्वार का डीईओ बनाने के पीछे सरकार की क्या मजबूरी थी? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?फर्जी नियुक्ति उर्दू अनुवादकों भी इस ही विभाग में एक नहीं तीन परन्तु मान्य मुख्यमंत्री जी आपके द्वारा इन सब को दबाया जा रहा है।आप हर क्षेत्र में नकाम हो।

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