सत्ता के सुरूर में सीएम के सलाहकार!

मामचन्द शाह// मुख्यमंत्री से ज्यादा तेज भागते सलाहकार सरकारी खर्च पर राजनीति चमकाने में लगे सलाहकार उत्तराखंड  में मुख्यमंत्रियों की राजनीति चौपट करने में मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ उनके सलाहकारों का भी अभूतपूर्व योगदान रहा है। नित्यानंद स्वामी से लेकर त्रिवेंद्र रावत तक के बनाए सलाहकार फुल फार्म में हैं। सरकार की ओर से मिलने वाले […]

मामचन्द शाह//

मुख्यमंत्री से ज्यादा तेज भागते सलाहकार
सरकारी खर्च पर राजनीति चमकाने में लगे सलाहकार

उत्तराखंड  में मुख्यमंत्रियों की राजनीति चौपट करने में मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ उनके सलाहकारों का भी अभूतपूर्व योगदान रहा है। नित्यानंद स्वामी से लेकर त्रिवेंद्र रावत तक के बनाए सलाहकार फुल फार्म में हैं। सरकार की ओर से मिलने वाले लाखों रुपए वेतन, गाड़ी, घोड़ा, गनर, बंगला लेने वाले इन सलाहकारों ने आज तक उत्तराखंड में क्या सलाह दी, ये तो आज तक सूचना के अधिकार से भी ज्ञात नहीं हो सका। यहां तक कि प्रथम, द्वितीय, तृतीय अपील व राज्य सूचना आयोग तक में जाकर भी आज तक इन सलाहकारों द्वारा दी गई सलाह से परदा नहीं उठ पाया

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है। बहुत दिन नहीं हुए, जब उत्तराखंड के लोगों ने आर्येंद्र शर्मा से लेकर रंजीत रावत जैसे सलाहकारों के जलवे देखे। दोनों में समानता यह रही कि दोनों सरकारों पर भारी पड़कर विधानसभा के टिकट तक ले आए। हालांकि जनता ने सलाहकारों को उनके कार्यों को देखते हुए घर बिठा दिया।

उत्तराखंड की वर्तमान सरकार में बहुत सारे सलाहकार हैं। इन दिनों दो विशेष सलाहकार छाए हुए हैं। औद्येागिक सलाहकार केएस पंवार इसलिए चर्चा के केंद्र में हैं, क्योंकि यह पहला अवसर है, जब टेलीविजन चैनलों में कोई सलाहकार अपनी ओर से प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दे रहा है।
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट तो केएस पंवार से तीन कदम आगे बढ़ चुके हैं। रमेश भट्ट के बारे में हाल ही में खबरें प्रकाशित हुई कि उन्हें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बनने पर उन्हें दिल्ली के लोगों ने बाकायदा अवार्ड दिया। इस अवार्ड की खासियत यह रही कि जिस कमरे में मीडिया सलाहकार को यह अवार्ड दिया गया, वहां किसी और को कोई अवार्ड नहीं दिया गया। अर्थात यह अवार्ड कार्यक्रम मुख्यमंत्री के एकमेव मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट के लिए तय किया गया था। अब डबल इंजन वाली और जीरो टोलरेंस के नारे वाली सरकार ने सलाहकार बनाए हैं और आउटपुट तय करना भूल गई तो इसमें उत्तराखंड के सवा करोड़ लोगों का क्या दोष! उसे तो सलाहकारों से लेकर कलाकारों तक को झेलने की अब आदत ही पड़ गई है।

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