बड़ी खबर : अनियमितता मामले में कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी निलंबित। अन्य से मांगा स्पष्टीकरण

कृषि विभाग में अनियमितता मामले में सचिन ने संज्ञान लेते हुए कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी को निलंबित कर दिया है,वही अन्य से स्पष्टीकरण मांगा है।

दरअसल मामला मंत्री गणेश जोशी के कृषि विभाग का हैं। कृषि विभाग के जनपद देहरादून के रायपुर के कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी राजदेव पंवार और अन्य अधिकारियों पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में अनियमितता बरतने के आरोप लगे।

इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव कृषि विनोद कुमार सुमन ने कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी राजदेव पंवार को अनियमितता पर निलंबन के आदेश जारी किए।

साथ ही महानिदेशक कृषि को निर्देशित किया कि, तत्काल प्रकरण में संलिप्त न्याय पंचायत प्रभारी वीरेंद्र सिंह नेगी और सेवानिवृत विकासखंड प्रभारी विनोद धस्माना का स्पष्टीकरण प्राप्त कर नियम अनुसार विभागीय करवाई की जाए।

सचिव की ओर से जारी आदेश में मुख्य कृषि अधिकारी लतिका सिंह से योजना का सत्यापन/ निरीक्षण न करने और अपने दायित्वों में लापरवाही करने के कारण 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

 

जानिए पूरा मामला…

 

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी ने गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राज्य में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में हुए घोटालों का पर्दाफाश कर निम्न बिन्दुओं की ओर पत्रकारों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा किः-

राज्य में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में आपसी मिली भगत से 1.5 करोड़ खा गए अधिकारी और निजी कंपनी।

दसौनी ने आरोप लगाया कि विभागीय मंत्री की विधानसभा में इस बड़े कारनामों को अंजाम दिया गया है और यह बिना मंत्री के संरक्षण या सांठ गांठ के संभव नहीं है।

दसौनी ने बताया की सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार 200 किसानों के अधिकारों पर डाला गया डाका, फर्जी साइन कर निकाल लिए पैसे। 

दसौनी ने बताया कि 2022-23 के वित्तीय वर्ष 31 मार्च को खत्म होने से पहले 28 मार्च 2023 को एक ही मोहर और एक ही दिन 200 खातों में डेढ़ करोड़ रुपया ट्रांसफर कर दिया गया। 

दसौनी के अनुसार मृत किसानो के भी कर दिए गए साइन, और तो और अनपढ़ महिला है लेकिन सत्यापन पर अंग्रेजी में साइन।

एक ही दिन में 200 किसानों का सत्यापन, एक ही वकील की मुहर, सत्यापन का एक भी फोटो मौजूद नही जबकि नियमानुसार फील्ड में जाकर करना होता हैं सत्यापन। किसानों के घर पानी नहीं हैं लेकिन लाखो के पाइप और फुव्वारे फेंक गए अधिकारी। 

कृषि विभाग के विधानसभा, ब्लॉक और न्यायपंचयात स्तर के अधिकारियों और निजी कंपनी की मिलीभगत का मामला। 

मामले में 4 से 6 अलग अलग कंपनियों की संलिप्तता, सभी कंपनियां एक ही व्यक्ति या रिश्तेदारों की होने की संभावना। 

सवाल खड़ा होता है कि मामला पूरी तरह से विभागीय मंत्री की विधानसभा से जुड़ा हैं उसके बावजूद भी कोई कार्यवाही नही, क्या मंत्री की शह पर सब हुआ है?

दसोनी ने प्रदेश के मुखिया का आह्वान करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री धामी स्वयं को भ्रष्टाचार पर चोट करने वाला और जीरो टॉलरेंस का मुख्यमंत्री कहते हैं तो उन्हें चुनौती है कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की सच्चाई प्रदेश की जनता के सामने रखें, उसमें किस तरह से पैसे की बंदर बाट हो रही है और किसानों के अधिकार और हक का पैसा मारा जा रहा है इसको जनता के सामने रखें। 

दसौनी ने यह भी कहा कि जो भी मंत्री विधायक या अधिकारी गरीब किसानों के हक् का पैसा या निवाला खा रहे हैं उनका जमीर किस हद तक मर चुका होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

दसौनी ने कहा की क्योंकि योजना का नाम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना है इसलिए डबल इंजन के मंत्री और विधायक किस तरह से प्रधानमंत्री के नाम पर बट्टा लगा रहे हैं यह प्रधानमंत्री कार्यालय को संज्ञान लेना चाहिए।

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