बड़ी खबर : 8 दिन की मेहनत के बाद पिंजरे मे फंसा गुलदार

जयप्रकाश नौगाईं श्रीनगर गढ़वाल : आठ दिन की मेहनत के बाद आज गढ़वाल रिजर्व फॉरेस्ट टीम श्रीनगर गढ़वाल के हाइडिल कॉलोनी स्थित पिंजरे में एक गुलदार को पकड़ने में सफल रही है, जिसे पकड़ने के बाद नागदेव रेंज पौड़ी गढ़वाल भेज दिया गया है, जहां पर डॉक्टरों की टीम सैंपल लेने के बाद यह जांच […]

जयप्रकाश नौगाईं

श्रीनगर गढ़वाल : आठ दिन की मेहनत के बाद आज गढ़वाल रिजर्व फॉरेस्ट टीम श्रीनगर गढ़वाल के हाइडिल कॉलोनी स्थित पिंजरे में एक गुलदार को पकड़ने में सफल रही है, जिसे पकड़ने के बाद नागदेव रेंज पौड़ी गढ़वाल भेज दिया गया है, जहां पर डॉक्टरों की टीम सैंपल लेने के बाद यह जांच करेगी कि यह आदमखोर गुलदार है या फिर अन्य को।

वहीं गढ़वाल रिजर्व फॉरेस्ट के प्रभागीय वनाधिकारी अनिरुद्ध स्वपनिल ने स्वयं श्रीनगर गढ़वाल में मोर्चा संभाला हुआ है,और अपनी सारी टीम बाघ को पकड़ने में लगा रखी है। जिसमें वन विभाग सफल भी रहा है,उन्होंने एक गुलदार को पकड़ करके उसे नागदेव स्थित रेंज भेज दिया है।

वहीं इससे पहले वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए खिर्शू और श्रीनगर शहर के मध्य तीन पिंजरे लगाएंम हैं,और गुलदार को मारने के लिए एक मचान भी बना रखा है, जिस पर उन्होंने एक शूटर भी तैनात कर रखा है।

 बीती रात को गुलदार पिंजरे में फंस गया , जिसको वन विभाग की टीम ने अपने कब्जे में ले लिया है।

 गढ़वाल रिजर्व फॉरेस्ट के डीएफओ अनिरुद्ध स्वपनिल ने बताया कि अभी एक गुलदार की चहल कदमी शहर में देखी जा रही है, जो कि उनकी ट्रैपिंग और कैमरे की निगरानी में भी आ रहा है, उन्होंने कहा कि उस गुलदार पर भी वन विभाग के ड्रोन और ट्रेपिंग कैमरे नजर बनाये हुए है।

 इसी संबंध में उन्होंने श्रीनगर की समस्त जनता के लिए यह भी अपील दी कि वह सुबह और शाम की पाली में घूमने के लिए कतई न जाएं। तथा साथ ही विशेष करके अपने छोटे बच्चों का ध्यान रखें।

 विगत 3 फरवरी को खिर्सू ब्लॉक के ग्वाड़ गांव में 11 वर्षीय अंकित को गुलदार ने अपना निवाला बनाया था। तदुपरांत 24 घंटे बाद हाइडिल कॉलोनी में आर्यन नाम के बालक को गुलदार ने अपना निवाला बनाया था।

 इसको देखकर  वन विभाग ने जगह-जगह अपने कमरे एवं ड्रोन के माध्यम से गुलदार पर निगरानी रखी हुई है। वहीं उन्होंने गस्त वाली टीम को भी वन  में भेजा है।

 नागदेव रेंज के वन क्षेत्राधिकारी ललित मोहन नेगी का कहना है कि जब तक दूसरा गुलदार भी ना पकड़ा जाए तब तक अभिभावक अपने छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखें और अकेले जंगल की तरफ न जाएं।

 समय पर आवश्यक सामग्री हेतु बाजार से जल्दी अपने गंतव्य को चले जाएं क्योंकि गुलदार आदमखोर हो चुका है।

 

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