बड़ी खबर: सिचाई नहरें क्षतिग्रस्त, विभाग पस्त काश्तकार त्रस्त

16 जून 2025 पुरोला। नीरज उत्तराखंडी 
–ग्रामीणों ने लघु सिंचाई विभाग से की मरम्मत की मांग, धान की पौध सूखने की कगार पर।
पुरोला। सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त होने से काश्तकार धान की रोपाई को लेकर चिंतित है। नहरें बदहाल होने से खेतों तक फनी पहुंचना काफी मुश्किल है।
वहीं दूसरी ओर सिंचाई के अभाव में क्यारियों में धान की पौध सूखने की कगार पर पहुंच गई। ग्रामीणों ने समय रहते लघु सिंचाई विभाग से सिंचाई नहरों को ठीक करने की मांग की है।
बताते चलें कि विकास खंड पुरीला के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई का कार्य नजदीक आ गया है। सिंचाई नहरे मरम्मत न होने के कारण क्षतिग्रस्त पड़ी है। पुरोला के करड़ा और मैराणा के दराऊ नाम तोक में लघु सिंचाई की दशकों पुरानी नहर क्षतिग्रस्त है। काश्तकारों के खेतों तक पानी न पहुंचने के कारण धान कि रोपाई के लिए चिंतित हैं। क्षेत्र के काश्तकार जयेंद्र सिंह, केदार सिंह, प्रताप सिंह रावत और गब्बर सिंह ने लघु सिंचाई विभाग पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि विभाग के अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन नहर की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
धान की रोपाई का सीजन चरम पर होने के बावजूद विभाग नहर को सुचारू करने के लिए बजट का आभाव बता रहा है।
ग्रामीणों ने विभाग से फिलहाल रोपाई के लिए अस्थाई व्यवस्था करने की गुहार लगाई, लेकिन विभाग के पास अस्थाई व्यवस्था के लिए प्लास्टिक के पाइप तक की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि लघु सिंचाई विभाग के पास प्लास्टिक के पाइप लगवाने तक की व्यवस्था नहीं है. तो नहर को लघु सिंचाई विभाग से हटाकर सिंचाई विभाग को स्थानांतरित किया जाए।
इसके साथ ही, उन्होंने धान रोपाई के लिए पानी की अस्थाई व्यवस्था तुरंत करने की भी मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो ये बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
सहायक अभियंता एसके शर्मा का कहना है कि विभाग के पास नहर निर्माण के लिए कोई धन उपलब्ध नहीं है धन उपलब्ध होने पर कार्य शुरू किया जाएगा।

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