देहरादून। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड सरकार को आदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे आईएफएस अधिकारी और पूर्व कार्बेट निदेशक व मुख्य वन संरक्षक (CCF) राहुल के खिलाफ विभागीय जांच तीन महीने में पूरी की जाए।
साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी एक महीने के भीतर दी जाए।
मामले के अनुसार,कार्बेट टाइगर रिजर्व में सफारी प्रोजेक्ट के नाम पर नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई की गई। इस प्रकरण ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं और मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह निर्देश तब दिया, जब सुनवाई के दौरान सामने आया कि धामी सरकार ने अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की मंजूरी दी, लेकिन राहुल को विशेष पोस्टिंग दी गई। जबकि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने उनके खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियां की थीं।
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से सवाल किया कि “इस अफसर को विशेष छूट क्यों दी गई?” अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब विभागीय जांच को तेजी से पूरा करना होगा।
सीबीआई करेगी मुकदमा
उधर, शासन ने सीसीएफ राहुल के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। साथ ही प्रमुख वन संरक्षक प्रशासन को अनुशासनिक कार्रवाई के लिए जांच अधिकारी भी नामित किया गया है।
यह मामला कार्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरो क्षेत्र में नियम विरुद्ध सफारी निर्माण और वृक्षों के अवैध पातन से जुड़ा है। इसकी जांच सीबीआई कर रही थी। करीब पांच माह पूर्व सीबीआई ने शासन से राहुल के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी थी, जो अब मंजूर हो चुकी है।



