देहरादून, 06 अक्टूबर 2025/नीरज उत्तराखंडी
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय बांध विस्थापित बंजारावाला में स्कूली बच्चों से रेत-बजरी उठवाने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रधानाचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सोशल मीडिया वीडियो से खुला मामला
6 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें सरकारी प्राथमिक विद्यालय के छोटे बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में तसले और फावड़े से रेत उठाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बच्चे स्कूल परिसर में रेत और बजरी को एक जगह से दूसरी जगह ढो रहे हैं।
वीडियो सामने आने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया और उप शिक्षा अधिकारी रायपुर को जांच के निर्देश दिए।
जांच में हुई पुष्टि
जांच के दौरान उप शिक्षा अधिकारी रायपुर ने रिपोर्ट में पुष्टि की कि विद्यालय में बच्चों से बाल श्रम कराया जा रहा था, जो कि शिक्षा नियमों और बाल संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
इस रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा), देहरादून ने विद्यालय की प्रधानाचार्य को तत्काल निलंबित करते हुए रायपुर कार्यालय में सम्बद्ध कर दिया है।
अन्य शिक्षिकाओं पर भी गिरेगी गाज
जिला शिक्षा अधिकारी ने यह भी बताया कि विद्यालय में कार्यरत अन्य शिक्षिकाओं से स्पष्टीकरण मांगा गया है, और यदि उनकी लापरवाही या सहभागिता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने जताई कड़ी नाराज़गी
इस घटना ने शिक्षा विभाग को हिला कर रख दिया है। अधिकारियों का कहना है कि विद्यालय परिसर में बच्चों से शारीरिक श्रम करवाना बाल अधिकारों का उल्लंघन है और शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम का भी सीधा उल्लंघन है।
क्या कहता है कानून?
भारतीय कानून के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। शिक्षा संस्थानों में ऐसा होना न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।



