बड़ी खबर: उत्तराखंड सर्विस ट्रिब्यूनल ने महिला दरोगा के पक्ष में सुनाया निर्णय। SSP और IG के आदेश रद्द

नैनीताल/काशीपुर।
उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण (Uttarakhand Public Service Tribunal) की नैनीताल पीठ ने पुलिस विभाग में कार्यरत महिला दरोगा तरन्नुम सईद के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है।

अधिकरण ने एसएसपी अल्मोड़ा और आईजी कुमाऊं के दंड आदेश को अवैध और विधिविरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया है।

अधिकरण की सदस्य (प्रशासनिक) कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की पीठ ने माना कि महिला दरोगा को दी गई निंदा प्रविष्टि (Censure Entry) अत्यधिक शीघ्रता में और मिलीभगत के केवल संदेह के आधार पर दी गई थी। इसलिए इसे न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।

मामला क्या है?

यह पूरा मामला वर्ष 2021 का है, जब उपनिरीक्षक तरन्नुम सईद अल्मोड़ा जिले के थाना सल्ट में तैनात थीं। उन्हें वाहन दुर्घटना से जुड़ी मुकदमा संख्या 09/2021 की विवेचना सौंपी गई थी।
तरन्नुम सईद ने अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से पालन करते हुए वाहन मालिक और गवाहों के बयान दर्ज किए।

बयानों के आधार पर सुरेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह के नाम सामने आए, जिनकी सीडीआर लोकेशन प्राप्त करने के लिए उन्होंने एसएसपी अल्मोड़ा को पत्र लिखा।

लेकिन, सीडीआर रिपोर्ट न आने और वीडियो साक्ष्य लंबित रहने के बीच ही विवेचना किसी अन्य अधिकारी को हस्तांतरित कर दी गई। बाद में इस मामले की प्रारंभिक जांच पुलिस उपाधीक्षक, रानीखेत को सौंपी गई, जिन्होंने बिना स्वतंत्र साक्ष्यों के रिपोर्ट दी कि तरन्नुम सईद ने जानबूझकर गलत दिशा में जांच की और वाहन मालिक को बीमा लाभ पहुंचाने का प्रयास किया।

 दंड और अपील की प्रक्रिया

इस रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी अल्मोड़ा ने 6 मई 2023 को तरन्नुम सईद की चरित्र पंजिका में निंदा प्रविष्टि दर्ज करने का आदेश दिया।
इसके खिलाफ दरोगा ने आईजी कुमाऊं परिक्षेत्र, नैनीताल के पास अपील दायर की, लेकिन आईजी ने भी 5 अप्रैल 2024 को अपील खारिज कर दी।

इसके बाद, दरोगा तरन्नुम सईद ने अपने अधिवक्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट के माध्यम से उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण नैनीताल पीठ में याचिका संख्या 16/2025 दायर की।

 अधिकरण का फैसला

अधिकरण की पीठ ने अधिवक्ता नदीम उद्दीन के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि:

“महिला दरोगा को दी गई निंदा प्रविष्टि स्पष्ट रूप से अतिशीघ्रता में और केवल संदेह के आधार पर दी गई प्रतीत होती है, जो विधिक दृष्टिकोण से स्थिर नहीं रखी जा सकती।”

इसलिए, ट्रिब्यूनल ने:

  • एसएसपी अल्मोड़ा द्वारा जारी दंड आदेश (06.05.2023)
  • और आईजी कुमाऊं के अपील आदेश (05.04.2024)

दोनों को विधिविरुद्ध और अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया।

आगे के निर्देश

अधिकरण ने एसएसपी अल्मोड़ा को निर्देश दिया है कि वह:

  • 30 दिनों के भीतर महिला दरोगा की चरित्र पंजिका से निंदा प्रविष्टि हटाएं
  • और सभी रोके गए सेवा लाभ जारी करें, साथ ही अनुमन्य अन्य लाभ भी प्रदान करें

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