डॉल्फ़िन इंस्टीट्यूट में संविधान दिवस पर व्याख्यान एवं क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन

देहरादून, 26 नवम्बर। डॉल्फ़िन (पी.जी.) इंस्टीट्यूट, देहरादून में आज संविधान दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भारतीय संविधान के निर्माण, विकास और वर्तमान प्रासंगिकता पर विशेष व्याख्यान एवं क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने […]

देहरादून, 26 नवम्बर।
डॉल्फ़िन (पी.जी.) इंस्टीट्यूट, देहरादून में आज संविधान दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भारतीय संविधान के निर्माण, विकास और वर्तमान प्रासंगिकता पर विशेष व्याख्यान एवं क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर जगमोहन सिंह राणा, पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड लोक सेवा आयोग रहे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अनीता रावत, पूर्व निदेशक, यूज़रक (USERC) ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

अपने प्रेरक संबोधन में प्रो. जगमोहन सिंह राणा ने भारतीय संविधान के “सफरनामा” पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संविधान सभा की भूमिका, डॉ. भीमराव अम्बेडकर और अन्य निर्माताओं के योगदान, संविधान को तैयार करने में लगे समय, किए गए विस्तृत विमर्श तथा समय–समय पर हुए प्रमुख संशोधनों पर रोचक ढंग से चर्चा की। उन्होंने प्रस्तावना, मूल अधिकार, मूल कर्तव्य, राज्य के नीति निदेशक तत्व जैसे महत्वपूर्ण भागों को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि भारतीय संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता, सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक है।

डॉ. अनीता रावत ने अपने संबोधन में युवा पीढ़ी की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता, संवैधानिक मूल्यों, लैंगिक संवेदनशीलता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने अधिकारों के साथ–साथ कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करते हैं, तभी संविधान की आत्मा सशक्त होती है और राष्ट्र की प्रगति संभव होती है।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में भारतीय संविधान और “संविधान का सफर” विषय पर क्विज़ प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न संकायों के छात्र–छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की संवैधानिक जानकारी, विश्लेषण क्षमता और तर्कशीलता का मूल्यांकन किया गया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति–पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए।

संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि डॉल्फ़िन इंस्टीट्यूट में संविधान दिवस जैसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक बनने की भावना विकसित की जाती है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित छात्र–छात्राओं एवं शिक्षक–कर्मचारियों ने संविधान के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए संकल्प लिया कि वे सदैव राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

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