- जिला योजना की सूची में फिताड़ी का नाम दर्ज होने से हुआ भ्रम, विधायक दुर्गेश लाल ने पत्रकार वार्ता में स्थिति की साफ
पुरोला, 20 अगस्त 2026। नीरज उत्तराखंडी
विधानसभा क्षेत्र में जिला योजना के तहत 25 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत अल्ट्रासाउंड मशीन को लेकर उठे विवाद पर पुरोला विधायक दुर्गेश लाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मशीन फिताड़ी में नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मोरी में स्थापित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जिला योजना की सूची में फिताड़ी का नाम दर्ज होना एक त्रुटि के कारण हुआ है, जबकि मशीन की स्थापना का वास्तविक उद्देश्य मोरी क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना है।
विधायक ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि विधानसभा क्षेत्र के उपजिला चिकित्सालय पुरोला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव में पहले से ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में तीसरी मशीन मोरी क्षेत्र में स्थापित किया जाना अधिक उपयोगी होगा, ताकि सीमांत एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पुरोला, नौगांव या अन्य स्थानों की ओर लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
मोरी में मशीन की जरूरत पर जोर
विधायक के मुताबिक मोरी विकासखंड भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सीएचसी मोरी पर निर्भर रहती है। अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होने से गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और अन्य जरूरतमंद लोगों को स्थानीय स्तर पर जांच की सुविधा मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि 25 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित मशीन सीएचसी मोरी में स्थापित होने के बाद क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी। इससे मरीजों को जांच के लिए अतिरिक्त खर्च और समय दोनों बचाने में मदद मिलेगी।
फिताड़ी में आधारभूत सुविधाओं का अभाव
विधायक ने फिताड़ी का नाम जिला योजना की सूची में दर्ज होने को त्रुटि बताते हुए कहा कि वहां आयुर्वेदिक चिकित्सालय के पास फिलहाल अपना भवन तक उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा बिजली सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसी स्थिति में अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन की स्थापना व्यवहारिक नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि पहले आवश्यक आधारभूत ढांचे का विकास होना जरूरी है। इसलिए वर्तमान में मशीन को सीएचसी मोरी में स्थापित किया जाना ही क्षेत्रहित में उचित निर्णय है।
113 गांवों की आबादी को मिलेगा लाभ
सीएचसी मोरी में अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू होने से मोरी क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के विस्तृत ग्रामीण क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। विधायक के अनुसार फतेपर्वत, पंचगाईं, अडोर, बड़ासू, सिगतूर, गडूगाड़ तथा आराकोट-बंगाण क्षेत्र के करीब 113 गांवों के लोगों को इससे सीधा लाभ मिल सकता है।
खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए दूरस्थ क्षेत्रों से महिलाओं और उनके परिजनों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ते हैं।
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सूची में गलती ने खड़ा किया विवाद
जिला योजना की सूची में फिताड़ी का नाम सामने आने के बाद अल्ट्रासाउंड मशीन को लेकर क्षेत्र में चर्चा और सवाल उठने लगे थे। लोगों के बीच यह सवाल था कि जहां बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और भवन का अभाव है, वहां लाखों रुपये की मशीन किस प्रकार संचालित होगी। विधायक की सफाई के बाद अब स्पष्ट किया गया है कि मशीन का प्रस्तावित स्थान फिताड़ी नहीं, सीएचसी मोरी है।
विधायक ने कहा कि जिला योजना की सूची में नाम दर्ज होने की त्रुटि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी, जिसे अब स्पष्ट कर दिया गया है।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए स्थानीय जांच सुविधा जरूरी
मोरी और आराकोट-बंगाण जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता लंबे समय से चुनौती रही है। ऐसे में सीएचसी स्तर पर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सुविधा उपलब्ध होना स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि मशीन की खरीद, स्थापना और संचालन के साथ प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
क्षेत्रवासियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि 25 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से मशीन की खरीद और स्थापना कब तक पूरी होती है और सीएचसी मोरी में नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा कब शुरू होती है।


