चकराता, 20 मई 2026।
रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत रिखनाड रेंज की गोराघाटी में वन विभाग की चौकी के समीप ही एक विशाल देवदार वृक्ष के अवैध पातन का मामला उजागर होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली और जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर यह अवैध कटान हुआ, वह वन चौकी से कुछ ही दूरी पर स्थित है, फिर भी वनकर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने इसे वन माफिया तथा विभागीय कर्मचारियों की कथित मिलीभगत का परिणाम बताया है।
जानकारी के अनुसार, आरक्षित वन क्षेत्र गोराघाटी में बेखौफ तस्करों ने लगभग 30 से 40 मीटर ऊँचे देवदार के पेड़ को अवैध रूप से काट डाला। देवदार जैसे बहुमूल्य वृक्ष का चौकी के निकट इस तरह धराशायी हो जाना वन विभाग की निगरानी व्यवस्था की पोल खोलता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन चौकी के पास ही जंगल सुरक्षित नहीं हैं, तो दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
पुनाह पोखरी क्षेत्र पंचायत सदस्य सरदार सिंह चौहान, स्याणा विजयपाल सिंह, पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह, अतर सिंह, जयपाल सिंह और संजय सहित अनेक ग्रामीणों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जंगलों में लगातार हो रहे अवैध कटान के पीछे विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को हक-हकूक के तहत मिलने वाली माफी लकड़ी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, जबकि तस्कर वन विभाग की नाक के नीचे बहुमूल्य देवदार के वृक्षों का सफाया कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने मामले की शिकायत प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) से करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र के घने देवदार वन माफियाओं की भेंट चढ़ जाएंगे।
शिकायत के बाद वन विभाग हरकत में आया। रिखनाड रेंज के रेंजर विनोद चौहान ने बताया कि विभागीय टीम ने मौके से एक आरा मशीन बरामद कर कब्जे में ले ली है। इस मामले में छुल्टाड़ निवासी राजपाल के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम के तहत नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है तथा विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
प्रभागीय वनाधिकारी वैभव कुमार सिंह ने घटना का संज्ञान लेते हुए सभी वनकर्मियों को जंगलों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कटान में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि जौनसार-बावर क्षेत्र के वन न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और पारिस्थितिक संतुलन का भी आधार हैं। ऐसे में वन चौकी के निकट देवदार के वृक्ष का अवैध कटान यह संकेत देता है कि यदि निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी नहीं बनाया गया, तो आने वाले समय में बहुमूल्य वन संपदा को गंभीर क्षति पहुँच सकती है।





