ज्वालापुर में मत्स्य तालाबों की असुरक्षा से युवा की दर्दनाक मौत, प्रशासन की उदासीनता बरकरार

हरिद्वार, 22 दिसंबर: ज्वालापुर थाना इलाके में सुल्तानपुर राजा गार्डन पथ पर मत्स्य विभाग के दो विशाल जलाशय लगातार नागरिकों के जीवन के लिए गंभीर जोखिम साबित हो रहे हैं। संकुचित मार्ग, इन दिनों गाढ़ा धुंध और संरक्षा उपायों की अनुपस्थिति के चलते सड़क तथा जलाशय के बीच भेदभाव करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। इस वजह से क्षेत्रवासी अपनी सुरक्षा के लिए भारी मूल्य चुका रहे हैं।

पिछले 20 दिसंबर को शनिवार की देर शाम इस लापरवाही ने एक और जीवन को लील लिया। 20 साल का अभय शर्मा किसी आवश्यक कार्य से दोपहिया वाहन पर इसी रास्ते से जा रहा था। अंधकार, धुंध और जलाशय के किनारे किसी प्रकार के परावर्तक या सावधानी चिन्हों की कमी से अभय मार्ग का अनुमान नहीं लगा पाया और वाहन सहित जलाशय में गिर पड़ा। इस दुर्घटना में उसकी जान चली गई।

पहले भी घटित हो चुकी हैं ऐसी वारदातें, फिर भी सतर्क नहीं हुआ प्रशासन: जलाशयों को पट्टे पर संचालित करने वाले महेंद्र ने कहा कि आस-पास का इलाका अब घनी आबादी वाला हो चुका है। पिछले कई माह से इस स्थान पर दुर्घटनाएं निरंतर हो रही हैं। धुंध और रात्रिकाल में व्यक्तियों को मार्ग स्पष्ट नहीं दिखता। जलाशय और सड़क के मध्य कोई स्पष्ट विभाजन न होने से वाहन सीधे पानी में चले जाते हैं। महेंद्र ने शनिवार की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि रात में एक युवा दोपहिया वाहन समेत जलाशय में गिर गया, जिससे उसका जीवन समाप्त हो गया।

परिवार का एकमात्र आधार छिन गया: अभय शर्मा हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र में निवास करते थे और अपने घर के एकमात्र पुत्र थे। उनके अकस्मात निधन से शर्मा परिवार पर विपत्तियों का बोझ टूट पड़ा है। परिजनों का मानना है कि वे अपने पुत्र को लौटा तो नहीं सकते, लेकिन इच्छुक हैं कि भविष्य में किसी अन्य घर को इस तरह की यातना न झेलनी पड़े।

संरक्षा बाड़ या निर्देश पट्टिकाओं की आवश्यकता: परिवार और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि सुल्तानपुर राजा गार्डन पथ पर अविलंब संरक्षा कदम उठाए जाएं। जलाशय के तट पर संरक्षा दीवार का निर्माण किया जाए या न्यूनतम स्पष्ट निर्देश पट्टिकाएं, परावर्तक तथा खतरा सूचक लगाए जाएं, ताकि चालक समय पर मोड़ और संकट का आकलन कर सकें।

ज्वालापुर थानाध्यक्ष कुंदन सिंह राणा ने जानकारी दी कि प्रकरण की पड़ताल जारी है। संबद्ध विभागों के साथ तालमेल स्थापित कर संरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

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