आचार संहिता में ट्रांसफर हुए शिक्षकों पर सरकार का जीरो टॉलरेंस फेल

कृष्णा बिष्ट

आचार संहिता में प्रदेश की हरीश रावत सरकार ने कुछ गंभीर बीमार शिक्षकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले नियम विरुद्ध कर दिए थे। इन तबादलों पर प्रदेश में शिक्षकों ने तथा शिक्षक संघों ने बड़ा घमासान किया था, जिसमें वर्तमान प्रदेश सरकार ने इसमें एक्ट के अनुसार गंभीर बीमार शिक्षकों को राहत देते हुए बाकी सभी शिक्षकों को उनके मूल तैनाती स्थल पर वापस भेजने का आदेश 25 अप्रैल 2018 को कर दिया था।

इसको लेकर बहुत से शिक्षक कोर्ट चले गए थे, किंतु शिक्षकों को कोर्ट से भी राहत नहीं मिल पाई, बल्कि कोर्ट ने भी नियमानुसार गंभीर बीमार शिक्षकों को राहत देते हुए 26 अक्टूबर 2018 को बाकी सभी की याचिका निरस्त कर दी थी। अब सरकार खुद ही अपने कदम से पीछे हटती नजर आ रही है तथा इसमें गंभीर बीमार शिक्षकों के साथ चहेते शिक्षकों को भी लाभ देने पर लगी है। इसमें उन स्थानांतरणों को बार-बार यथावत रखने का आदेश जारी किया जा रहा है। 25 फरवरी 2019 को भी बोर्ड परीक्षा की आड़ लेकर उन्हें रोकने का आदेश जारी किया गया तथा 30 मार्च 2019 को आचार संहिता की आड़ में स्थानांतरण यथावत रखने का आदेश जारी किया गया।

 

उसके बाद 21 मई 2019 को शासन ने इन शिक्षकों को 25 जून 2019 को स्थानांतरण आदेश यथावत रखने का आदेश जारी किया गया। इनमें कुछ शिक्षकों को एक्ट के अनुसार गंभीर बीमारी को छोड़ दें तो अधिकतर शिक्षक नियम विरुद्ध स्थानांतरण पाने में सफल हुए हैं।
अब देखना यह है कि जीरो टोलरेंस को पलीता लगाते हुए कोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए अगला रोक का आदेश एक बार फिर कब निकलता है!

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