हाईकोर्ट ब्रेकिंग: इन ANM-GNM कर्मचारियों को नहीं मिलेगा ₹2800 ग्रेड पे। याचिकाएं खारिज

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नैनीताल। उत्तराखंड की महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ANM/GNM) को ₹2800 ग्रेड पे देने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त ANM/GNM कर्मचारियों को ₹2800 ग्रेड पे का लाभ नहीं दिया जा सकता और इस संबंध में दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2013 से पहले नियुक्त स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ₹2800 ग्रेड पे केवल न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में व्यक्तिगत वेतन (Personal Pay) के रूप में दिया गया था। जबकि बाद में नियुक्त कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों के तहत ₹2000 ग्रेड पे निर्धारित है।

समान कार्य का हवाला देकर की थी मांग

याचिकाकर्ता सुधा पांडे सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि वे वही शैक्षणिक योग्यता रखते हैं और वही कार्य कर रहे हैं, जो वर्ष 2013 से पहले नियुक्त स्वास्थ्य कर्मचारी कर रहे हैं। इसलिए उन्हें भी समान रूप से ₹2800 ग्रेड पे का लाभ मिलना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं ने 2 मई 2013 के शासनादेश और वर्ष 2016 के सेवा नियमों को चुनौती देते हुए समान वेतनमान की मांग की थी।

सरकार ने अदालत में रखा पक्ष

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जिन विज्ञापनों के आधार पर याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति हुई थी, उनमें स्पष्ट रूप से ₹2000 ग्रेड पे का उल्लेख किया गया था। उम्मीदवारों ने सभी शर्तों को स्वीकार कर नियुक्ति प्राप्त की और कई वर्षों तक सेवा देने के बाद अब वे उसी वेतनमान को चुनौती नहीं दे सकते।

सरकार ने यह भी कहा कि ₹2800 ग्रेड पे मूल रूप से स्वास्थ्य पर्यवेक्षक (Health Supervisor) पद के लिए निर्धारित है। पूर्व कर्मचारियों को यह लाभ विशेष परिस्थितियों में व्यक्तिगत वेतन के रूप में मिला था, जिसे सामान्य नियम नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वेतनमान तय करना मुख्य रूप से कार्यपालिका (Executive) का अधिकार क्षेत्र है और न्यायालय सामान्य परिस्थितियों में इसमें हस्तक्षेप नहीं करता।

अदालत ने माना कि वर्ष 2013 से पहले और बाद में नियुक्त कर्मचारियों के बीच किया गया वर्गीकरण ऐतिहासिक और वैधानिक आधार पर है। इसे न तो मनमाना कहा जा सकता है और न ही भेदभावपूर्ण।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं का वेतनमान नियुक्ति के बाद कम नहीं किया गया है। उन्हें वही वेतनमान दिया जा रहा है जो सेवा नियमों और भर्ती विज्ञापन में निर्धारित था। ऐसे में केवल “समान कार्य” का तर्क देकर ₹2800 ग्रेड पे की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।

ANM-GNM कर्मचारियों को बड़ा झटका

हाईकोर्ट के इस फैसले से उत्तराखंड में कार्यरत हजारों ANM और GNM कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है, जो लंबे समय से ₹2800 ग्रेड पे की मांग कर रहे थे। अदालत के फैसले के बाद फिलहाल वर्ष 2013 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को ₹2000 ग्रेड पे पर ही सेवा जारी रखनी होगी।

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