बड़ी खबर : दिनेशपुर नगर पंचायत की लापरवाही 13 लाख का निर्माण बना नशेड़ियों का अड्डा

कुमाऊँ ब्यूरो रिपोर्ट विशाल सक्सेना  दिनेशपुर उधम सिंह नगर एक ओर प्रदेश सरकार नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान का युद्धस्तर पर चला रही है, वहीं दूसरी ओर उधम सिंह नगर जनपद के दिनेशपुर में नगर पंचायत की लापरवाही ने सरकारी धन से बने “हाईटेक शौचालय” को नशा खोरों का अड्डा बना दिया है, सिंचाई विभाग नगर […]

कुमाऊँ ब्यूरो रिपोर्ट विशाल सक्सेना 

दिनेशपुर उधम सिंह नगर

एक ओर प्रदेश सरकार नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान का युद्धस्तर पर चला रही है, वहीं दूसरी ओर उधम सिंह नगर जनपद के दिनेशपुर में नगर पंचायत की लापरवाही ने सरकारी धन से बने “हाईटेक शौचालय” को नशा खोरों का अड्डा बना दिया है, सिंचाई विभाग नगर पंचायत की भूमि पर वार्ड नंबर 5 में निर्मित यह शौचालय 13 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था, लेकिन निर्माण के बाद से आज तक आम जनता के लिए नहीं खोला गया, परिणामस्वरूप, जिस सुविधा का उद्देश्य नागरिकों की विशेषकर महिलाओंकृको राहत देना था, वही असामाजिक तत्वों की शरणस्थली बन गई है, शहर के बीचोंबीच स्थित इस भूमि पर लंबे विवादों के बाद वर्तमान में नगर पंचायत का कब्जा है, तत्कालीन बोर्ड द्वारा यहां हाईटेक शौचालय का निर्माण कराया गया और दीवार पर तत्कालीन शहरी विकास मंत्री के उद्घाटन का शिलापट्ट भी लगाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शौचालय का ताला कभी खुला ही नहीं, न तो कोई नियमित संचालन व्यवस्था बनाई गई और न ही रखरखाव की जिम्मेदारी तय हुई, जांच में सामने आया कि शौचालय के ऊपर बने कमरे का दरवाजा टूटा हुआ है, अंदर जगह-जगह अंग्रेजी शराब की बोतलें, देशी शराब और कच्ची शराब के पाउच पड़े मिले, जिससे साफ है कि यहां नशे का खुलेआम उपयोग हो रहा है, स्थानीय लोगों का कहना है कि देर शाम के बाद यहां संदिग्ध गतिविधियां बढ़ जाती हैं, बड़ा सवाल यह है कि क्या यह निर्माण जनता की सुविधा के लिए था या नशेड़ियों के लिए? नगर में सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी है, ऐसे में यह बंद पड़ा हाईटेक शौचालय आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है, महिलाओं, बुजुर्गों और बाहर से आने वाले लोगों को शौच जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भटकना पड़ता है, वहीं, सरकारी धन से बनी यह संरचना असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनकर किसी बड़ी घटना की आशंका भी बढ़ा रही है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि न.प. प्रशासन को इस स्थिति की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, यहां तक कि उद्घाटन भी केवल शिलापट्ट तक सीमित रहा न कोई सार्वजनिक कार्यक्रम हुआ और न ही सुविधा शुरू की गई, लोगों का कहना है कि निर्माण में कई खामियां भी हैं, जो उपयोग शुरू होने पर सामने आएंगी, अब मांग उठ रही है कि नगर पंचायत तत्काल संज्ञान लेकर शौचालय को सार्वजनिक उपयोग के लिए खोले, संचालन की जिम्मेदारी तय करे और परिसर की सुरक्षा व निगरानी सुनिश्चित करे, सरकारी धन से बनी सुविधा यदि जनता तक न पहुंचे, तो यह केवल विकास नहीं प्रशासनिक विफलता का प्रमाण बन जाती है।

 

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